Summer express/हमीरपुर, अरविंद- -:हमीरपुर जिले में वर्षों से उपेक्षा का शिकार बनी पारंपरिक बावड़ियों और प्राकृतिक जल स्रोतों को फिर से जीवंत बनाने के लिए जिला प्रशासन ने नई पहल शुरू की है। इस अभियान के तहत नव निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को अपने-अपने क्षेत्रों की बावड़ियों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों के संरक्षण तथा रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसका उद्देश्य इन ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखते हुए उन्हें दोबारा उपयोग योग्य बनाना है।
जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद कई बावड़ियां समय के साथ देखभाल के अभाव में जर्जर हो गई थीं। इनमें गंदगी, झाड़ियां और मिट्टी भर जाने के कारण उनका मूल स्वरूप भी प्रभावित हुआ। अब प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत इन जल स्रोतों की साफ-सफाई, मरम्मत और सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है, जिससे उनकी पुरानी पहचान लौट सके।प्रशासन के अनुसार अब तक जिले में करीब 200 बावड़ियों और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों का जीर्णोद्धार किया जा चुका है। इन स्थानों को साफ कर संरक्षित किया गया है, ताकि स्थानीय लोग भविष्य में भी इनका लाभ उठा सकें। अभियान को आगे बढ़ाते हुए शेष जल स्रोतों को भी चरणबद्ध तरीके से विकसित करने की योजना बनाई गई है।
उपायुक्त हमीरपुर गंधर्वा राठौड़ ने बताया कि सभी खंड विकास अधिकारियों के साथ बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया है कि पंचायत प्रतिनिधि अपने क्षेत्रों में स्थित बावड़ियों, पॉंड और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण की निगरानी करेंगे। इससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों की ऐतिहासिक विरासत भी सुरक्षित रहेगी।उन्होंने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य जिले के सभी महत्वपूर्ण प्राकृतिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना है। पंचायतों की सक्रिय भागीदारी से यह अभियान और प्रभावी होगा तथा आने वाले समय में अधिक से अधिक बावड़ियां अपने पुराने स्वरूप में लौट सकेंगी। प्रशासन का मानना है कि इस पहल से जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहरों के संवर्धन को भी नई दिशा मिलेगी।