चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने कैंसर को नोटिफिएबल डिजीज घोषित करने का फैसला लिया है। इसके तहत अब राज्य के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, डायग्नोस्टिक लैबों तथा कैंसर उपचार केंद्रों को प्रत्येक नए कैंसर मरीज की जानकारी निर्धारित समय के भीतर स्वास्थ्य विभाग को देना अनिवार्य होगा।
सरकार इस उद्देश्य के लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार कर रही है, जहां मरीजों का पंजीकरण और निगरानी की जाएगी। नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकेगी। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कैंसर के सही आंकड़े उपलब्ध नहीं होने से उपचार, दवा, जांच सुविधाओं और रोकथाम संबंधी योजनाएं बनाने में कठिनाई आती है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य में कैंसर के मामलों का वास्तविक डाटा तैयार होगा, जिससे मरीजों की समय पर पहचान, उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर योजना बनाना संभव होगा। स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पतालों और लैबों को भी इस पोर्टल से जोड़ेगा, ताकि सभी मामलों की एकीकृत निगरानी की जा सके। इससे मरीजों की निगरानी में आसानी होगी।
सभी संस्थानों पर होंगे समान नियम
स्वास्थ्य विभाग के प्रस्ताव के अनुसार सरकारी और निजी क्षेत्र के सभी अस्पताल, पैथोलॉजी लैब तथा कैंसर उपचार केंद्र इस व्यवस्था के दायरे में आएंगे। मरीज की जानकारी छिपाने या रिपोर्ट नहीं भेजने पर संबंधित संस्थान के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग जल्द ही रिपोर्टिंग की प्रक्रिया और समय-सीमा संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर को नोटिफिएबल डिजीज घोषित करने से बीमारी का वास्तविक स्वरूप सामने आएगा। इससे कैंसर प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, संसाधनों का बेहतर आवंटन और मरीजों तक समय पर उपचार सुविधाएं पहुंचाने में मदद मिलेगी। साथ ही, भविष्य की स्वास्थ्य नीतियां अधिक सटीक आंकड़ों के आधार पर तैयार की जा सकेंगी।