Summer express, मोनिका रावत,चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने मृत पंप आपरेटर के भाई को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की मांग खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि अनुकंपा नियुक्ति किसी का निहित अधिकार नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि जिस पद पर नियुक्ति की मांग की गई थी, वह पहले से ही भरा हुआ है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि जिस सरकारी पत्र के आधार पर याचिकाकर्ता नियुक्ति की मांग कर रहा था, उसमें मृत कर्मचारियों के परिजनों को नौकरी देने का कोई निर्देश नहीं दिया गया था।जस्टिस निधि गुप्ता ने यह आदेश पलवल निवासी राजवीर की याचिका पर सुनाया। याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया था कि उसके भाई सुरेश की सेवा के दौरान मृत्यु होने के बाद ग्राम पंचायत अंधोप के रिक्त पंप आपरेटर पद पर उसे नियुक्त किया जाए। याचिका में 15 मार्च 2025 के उस पत्र का हवाला दिया गया, जिसके बारे में दावा किया गया कि उसमें सेवा के दौरान मृत पंप ऑपरेटर के परिवार के सदस्य को नियुक्ति देने के निर्देश जारी किए गए थे।याचिका के अनुसार सुरेश वर्ष 2016 से ग्राम अंधोप स्थित ट्यूबवेल नंबर-2 पर पंप आपरेटर के रूप में कार्यरत था। 4 मार्च 2025 को मल्टीपल आर्गन फेल्योर के कारण उसकी मृत्यु हो गई।
याचिकाकर्ता ने कहा कि सुरेश अविवाहित था और वह उसका एकमात्र पात्र परिजन है। उसने कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के ई-पहचान कार्ड का हवाला देते हुए बताया कि उसमें उसका नाम आश्रित के रूप में दर्ज है। राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध करते हुए कहा कि 15 मार्च 2025 का पत्र केवल विभागीय पत्राचार है, जिससे किसी को नियुक्ति का कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं होता। साथ ही, ब्लाक विकास एवं पंचायत अधिकारी, हथीन की 23 जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार संबंधित बूस्टर पर पंप ऑपरेटर का पद रिक्त नहीं है। हाई कोर्ट ने राज्य के तर्कों से सहमति जताई। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता यह तथ्य खंडित नहीं कर सका कि संबंधित पद पहले से भरा हुआ है। अदालत ने यह भी पाया कि याचिकाकर्ता ने कोर्ट में अपने भाई को अविवाहित बताया, जबकि ई-पहचान कार्ड में सुरेश की वैवाहिक स्थिति “विवाहित” दर्ज है और याचिकाकर्ता को आश्रित “पुत्र” के रूप में दर्शाया गया है।
अदालत ने 15 मार्च 2025 के पत्र की भी व्याख्या की और कहा कि उसमें मृत पंप ऑपरेटर के परिजन को नौकरी देने का कोई निर्देश नहीं है। पत्र में केवल यह जानकारी मांगी गई थी कि मृत कर्मचारी के स्थान पर उसका कोई पारिवारिक सदस्य कार्य कर रहा है या नहीं तथा यदि कर रहा है तो उसकी शैक्षणिक योग्यता क्या है। इसलिए इस पत्र को नियुक्ति का आदेश या नीति नहीं माना जा सकता।हाई कोर्ट ने दोहराया कि “अनुकंपा नियुक्ति कोई निहित अधिकार नहीं है और यह कर्मचारी की मृत्यु के समय लागू नीति, आर्थिक विपन्नता तथा पात्रता की शर्तों के कड़े परीक्षण के अधीन होती है।” इन तथ्यों और कानूनी स्थिति को देखते हुए अदालत ने राजवीर की याचिका खारिज कर दी।