Summer express, अंबाला। हरियाणा के अंबाला जिले में गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए चलाई जा रही डॉ. भीमराव आंबेडकर मकान नवीनीकरण अनुदान योजना में करोड़ों रुपये के कथित घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की तीन वर्ष तक चली जांच के बाद योजना में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को गंभीर मानते हुए 16 अधिकारियों, कर्मचारियों और एजेंटों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
जांच के अनुसार बीपीएल और अनुसूचित जाति वर्ग के कच्चे मकानों की मरम्मत के लिए शुरू की गई योजना में वर्ष 2018-19 से 2021-22 के बीच बड़े पैमाने पर नियमों की अनदेखी की गई। आरोप है कि पात्रता की जांच और भौतिक सत्यापन किए बिना हजारों आवेदनों को मंजूरी दे दी गई, जिसके चलते सरकारी खजाने से 17 करोड़ 3 लाख 34 हजार रुपये की राशि जारी कर दी गई।
एसीबी की जांच में सामने आया कि योजना के तहत 3,922 लाभार्थियों को आरटीजीएस के माध्यम से अनुदान राशि वितरित की गई। नियमों के मुताबिक आवेदन मिलने के बाद संबंधित तहसील कल्याण अधिकारी को मौके पर जाकर मकान की स्थिति का निरीक्षण करना अनिवार्य था, लेकिन कई मामलों में यह प्रक्रिया पूरी किए बिना ही फाइलों को स्वीकृति दे दी गई। जांच एजेंसियों का मानना है कि कागजी औपचारिकताओं के आधार पर लाभ स्वीकृत कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
मामले की जांच वर्ष 2022 में मुख्य सचिव के निर्देश पर शुरू हुई थी। इसी दौरान साहा निवासी एक शिकायतकर्ता द्वारा दी गई जानकारी के बाद पूरे प्रकरण की परतें खुलनी शुरू हुईं। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कुछ एजेंटों ने लाभार्थियों के बैंक खाते खुलवाने के बाद उनके एटीएम कार्ड अपने कब्जे में रख लिए थे। आरोप है कि अनुदान राशि खाते में पहुंचते ही एजेंट कथित तौर पर अपना कमीशन निकाल लेते थे और बाद में कार्ड लाभार्थियों को सौंपते थे।
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि योजना के तहत अनुदान राशि बढ़ाए जाने के बाद अनियमितताओं का दायरा भी बढ़ता गया। वर्ष 2018 में सहायता राशि 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये की गई थी, जबकि वर्ष 2021 में इसे बढ़ाकर 80 हजार रुपये कर दिया गया। इसके बाद कथित तौर पर फर्जी लाभार्थियों और अपात्र व्यक्तियों को योजना का लाभ दिलाने के मामलों में तेजी आई।
एसीबी ने इस मामले में तत्कालीन जिला कल्याण अधिकारी कमल कुमार, वर्तमान जिला कल्याण अधिकारी शीशपाल, तत्कालीन तहसील कल्याण अधिकारियों सहित कई कर्मचारियों और एजेंटों को नामजद किया है। सभी आरोपितों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी, सरकारी धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
जांच एजेंसियां अब वित्तीय लेन-देन, लाभार्थियों की वास्तविक पात्रता और इस कथित घोटाले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। मामले को अंबाला जिले में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक माना जा रहा है।