हजारों कर्मियों को पीएफ, ग्रेच्युटी, ईएसआई और छुट्टियों का लाभ मिलेगा, ठेका सिस्टम खत्म होगा
पांच साल सेवा वाले ग्रुप-सी व डी कर्मचारियों को सीधा अनुबंध
समर न्यूज | चंडीगढ़
पंजाब विधानसभा ने सोमवार को पंजाब राज्य आउटसोर्स कार्मिक (संविदात्मक नियुक्ति में बदलाव) विधेयक, 2026 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे आउटसोर्स कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला बताया।
पहले चरण में करीब 26 से 28 हजार कर्मचारियों को निजी ठेकेदारों के माध्यम से काम करने की व्यवस्था से निकालकर सीधे सरकार के साथ संविदात्मक नियुक्ति में लाया जाएगा।
पूरी योजना के दायरे में 51 विभागों के 65,048 आउटसोर्स कर्मचारी हैं।
नए प्रावधानों के तहत पात्र ग्रुप-सी और ग्रुप-डी कर्मचारियों को सीधे सरकारी अनुबंध पर लिया जाएगा। सामान्य श्रेणी के कर्मचारियों के लिए पांच साल की लगातार आउटसोर्स सेवा की पात्रता रखी गई है। वहीं आग बुझाने, सीवर, सफाई, कचरा प्रबंधन और बिजली लाइन जैसे जोखिम वाले काम करने वाले कर्मचारियों के लिए यह अवधि तीन साल रखी गई है।
{वेतन में एजेंसी की कटौती नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मचारियों को मिलने वाला पारिश्रमिक उनकी मौजूदा तनख्वाह या लागू न्यूनतम मजदूरी, जो भी निर्धारित हो, उससे कम नहीं होगा। आउटसोर्सिंग एजेंसियों की ओर से ली जाने वाली 15 से 22 प्रतिशत कमीशन राशि अब कर्मचारियों के वेतन से नहीं काटी जाएगी।
वेतन सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचाने की व्यवस्था होगी। पात्र कर्मचारियों को भविष्य निधि, ग्रेच्युटी, कर्मचारी राज्य बीमा, मातृत्व अवकाश और हर साल 10 दिन आकस्मिक अवकाश का लाभ मिलेगा। सरकार के अनुसार कर्मचारियों का सेवा रिकॉर्ड भी मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली में दर्ज होगा। इससे नियुक्ति, वेतन और सेवा संबंधी रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ाने का दावा किया गया है। पहले सरकार ने कहा था कि इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। यह फैसला सीधे नियमित सरकारी नौकरी देने के बराबर नहीं है। पहले पात्र कर्मचारियों को सरकार के साथ संविदात्मक नियुक्ति मिलेगी। इसके बाद 10 साल की संविदात्मक सेवा पूरी करने पर उन्हें स्वीकृत नियमित पदों के विरुद्ध समायोजन के लिए विचार किया जाएगा। यानी प्रक्रिया दो चरणों में आगे बढ़ेगी-पहले आउटसोर्स से सरकारी अनुबंध और फिर निर्धारित शर्तें पूरी होने पर नियमित पद पर समायोजन।
{ठेकेदार व्यवस्था होगी खत्म: मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि सरकार और कर्मचारी के बीच अब निजी ठेकेदार मध्यस्थ नहीं होंगे। सरकार का तर्क है कि इससे कर्मचारियों की नौकरी की असुरक्षा कम होगी और वेतन से एजेंसी शुल्क की कटौती भी समाप्त होगी। पहले घोषित योजना में 65,048 कर्मचारियों को 51 विभागों में इसके दायरे में रखा गया था।