हर शुल्क फीस में शामिल; तीन साल में 15% से ज्यादा बढ़ोतरी की राशि लौटानी होगी
पंजाब विधानसभा में फीस नियमन संशोधन विधेयक ध्वनिमत से पारित
पहली गलती पर 50 हजार, दूसरी पर एक लाख जुर्माना, तीसरी पर मान्यता रद्द होगी
समर न्यूज | चंडीगढ़
पंजाब विधानसभा ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर रोक लगाने के लिए पंजाब अनएडेड शैक्षणिक संस्थानों की फीस नियमन संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। नए प्रावधानों के तहत निजी स्कूल नए शैक्षणिक सत्र में फीस में पांच प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी नहीं कर सकेंगे। पांच प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि के लिए नियामक संस्था की पूर्व मंजूरी लेना जरूरी होगा।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि अभिभावकों से किसी भी मद में लिया जाने वाला पैसा फीस का हिस्सा माना जाएगा। इसमें ट्यूशन फीस के अलावा परिवहन, भवन निधि और अन्य शुल्क भी शामिल होंगे। सरकार निजी स्कूलों का फोरेंसिक ऑडिट कराएगी, ताकि तीन साल में वसूली गई फीस की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। जिन स्कूलों ने इस अवधि में कुल फीस में 15 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी की है, उनसे अतिरिक्त वसूली गई राशि अभिभावकों को वापस कराने का प्रावधान किया गया है।
विधेयक में नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर कार्रवाई का भी प्रावधान है। पहली बार उल्लंघन पर 50 हजार रुपये और दूसरी बार एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। तीसरी बार नियम तोड़ने पर स्कूल की मान्यता रद्द की जा सकेगी। फीस बढ़ोतरी के प्रस्तावों की जांच और नियमन के लिए जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में नियामक समिति काम करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा को कारोबार बनने नहीं देगी। उन्होंने पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कोविड काल में स्कूल बंद होने और वाहन नहीं चलने के बावजूद अभिभावकों से परिवहन शुल्क लिया गया था। मान ने कहा कि अब ऐसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
{32 लाख विद्यार्थियों को राहत का दावा: सरकार के अनुसार पंजाब के करीब 7,800 निजी स्कूलों में 32 लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं। सरकार का दावा है कि नए कानून से इन विद्यार्थियों और उनके परिवारों को मनमानी फीस वृद्धि से सुरक्षा मिलेगी। फीस के अलग-अलग मद बनाकर अतिरिक्त राशि वसूलने की गुंजाइश भी कम होगी।
{सरकार बोली- शिक्षा मुनाफे का कारोबार नहीं: मान ने कहा कि शिक्षा सार्वजनिक हित का विषय है और इसे केवल मुनाफा कमाने का माध्यम नहीं बनने दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि फीस नियमन से निजी स्कूलों के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी और अभिभावकों पर अनुचित आर्थिक बोझ कम होगा। वहीं, निजी स्कूल संगठनों की ओर से पहले फीस सीमा और नियमन के कुछ प्रावधानों पर आपत्तियां जताई गई थीं।
पंजाब विधानसभा ने नौ अहम विधेयक किए पारित
पंजाब विधानसभा ने सोमवार को शिक्षा, रोजगार, कर व्यवस्था, ग्रामीण विकास, बुनियादी ढांचे और पर्यावरण से जुड़े नौ महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए। इनमें पंजाब अनएडेड शैक्षणिक संस्थानों की फीस नियमन संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से मंजूरी मिली। होशियारपुर में क्लाउड यूनिवर्सिटी तथा पटियाला में एमएस डिजिटल यूनिवर्सिटी और फिजिक्सवाला डिजिटल यूनिवर्सिटी की स्थापना से संबंधित तीन विधेयक भी पारित किए गए। सदन ने पंजाब राज्य आउटसोर्स कर्मचारियों को संविदात्मक नियुक्ति में बदलने से संबंधित विधेयक को भी सर्वसम्मति से मंजूरी दी। इसके अलावा पंजाब वस्तु एवं सेवा कर संशोधन विधेयक, पंचायती राज संशोधन विधेयक और पंजाब कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर संशोधन विधेयक पारित किए गए। पंजाब संरक्षण वृक्ष विधेयक को भी बहुमत से मंजूरी मिली। सरकार के अनुसार, इन विधायी बदलावों का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत करना, शिक्षा को अधिक सुलभ बनाना, कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना, ग्रामीण संस्थाओं को मजबूत करना और राज्य में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।