नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को आंख के इलाज के लिए तीन सप्ताह तक विदेश यात्रा करने की अनुमति दे दी। अदालत ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को विदेश जाकर अपनी पसंद के स्थान पर चिकित्सा उपचार कराने का अधिकार है।
अभिषेक बनर्जी ने सितंबर में आंख के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगी थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के चिकित्सा उपचार का स्थान तय करना अदालत या किसी अन्य पक्ष का काम नहीं है। अदालत ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने इलाज के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार है।
हालांकि, विदेश यात्रा की अनुमति देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तें भी निर्धारित की हैं। अदालत ने अभिषेक बनर्जी को यात्रा का पूरा कार्यक्रम, उड़ानों की जानकारी, विदेश में ठहरने का स्थान और इलाज करने वाले डॉक्टरों तथा अस्पताल का पूरा विवरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ वर्ष 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कथित रूप से धमकी भरे बयान देने के आरोप में पुलिस मामला दर्ज है। बताया जाता है कि वर्ष 2016 में एक सड़क दुर्घटना में उनकी आंख में चोट लगी थी और उसी से संबंधित उपचार के लिए उन्होंने विदेश जाने की अनुमति मांगी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा नेताओं ने इस पर सवाल उठाए हैं। भाजपा नेताओं ने आशंका जताई कि विदेश यात्रा की अनुमति मिलने के बाद अभिषेक बनर्जी देश से बाहर रह सकते हैं। पश्चिम बंगाल की भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने आरोप लगाया कि वह अपनी चिकित्सा स्थिति का इस्तेमाल देश से बाहर जाने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें इलाज की जरूरत है तो राज्य के सरकारी अस्पतालों में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
वहीं, पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने भी विदेश यात्रा को लेकर अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी नेता भारतीय कानून से बचने के लिए अपने राजनयिक पासपोर्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, ये भाजपा नेताओं के आरोप हैं और अदालत के आदेश में ऐसा कोई निष्कर्ष दर्ज नहीं है।