Summer express/मंडी, धर्मवीर-: मंडी शहर के सेरी मंच पर राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर जारी प्रदर्शनी के दौरान 1 लाख का किन्नौरी शॉलनुमा पट्टू और 30 हजार का मफलर आकषर्ण का केंद्र बना हुआ है। इस शॉल और मफलर को सोलन जिला के अर्की निवासी नरेश कुमार ने प्रदर्शित किया है। नरेश कुमार ने बताया कि यह शॉल उत्तम क्वालिटी की वूल, अंगोरा और पश्मिना से बना हुआ है। इसमें बेहतरीन रंगों का इस्तेमाल किया गया है। शॉल पर महाभारत काल की प्राचीन चित्रकारी को प्रदर्शित करने के साथ ही किन्नौर की पारंपरिक कला को दर्शाया गया है। उन्होंने बताया कि एक शॉल और मफलर में इस्तेमाल होने वाला डिजाइन ही उसके बनने के समय को निर्धारित करता है। जिसमें जितना अधिक डिजाइन होता है उसे बनाने में उतना ही लंबा समय और मेहनत लगती है। साथ ही इसमें उत्तम क्वालिटी का मेटिरियल इस्तेमाल किया जाता है। जिस कारण इसकी लागत एक लाख तक पहुंच जाती है।
नरेश कुमार ने बताया कि किन्नौर और कुल्लू में शॉलनुमा पट्टू को पहनने की सदियों से परंपरा चली आ रही है। चाहे कोई शादी-विवाह हो या देवता से जुड़ा हुआ उत्सव, चाहे त्यौहार हो या अन्य कोई खास आयोजन, उस दौरान इसी शॉलनुमा पट्टू को पहना जाता है।नरेश कुमार ने बताया कि वह वर्ष 1990 से इस कार्य को कर रहे हैं और उन्होंने यह कला किन्नौर में ही सीखी है। आज दिन तक वे 500 से अधिक लोगों को इस कला का प्रशिक्षण दे चुके हैं जबकि मौजूदा समय में 30 से अधिक लोग उनके पास रोजगार कमा रहे हैं। इस कला के माध्यम से उन्हें अभी तक देश विदेशों में खासी पहचान मिली है। केंद्र व राज्य सरकारों के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने का मौका मिल रहा है जिससे अच्छा रोजगार चल रहा है।