Summer express , नई दिल्ली | घरेलू बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने इसकी उपलब्धता बढ़ाने और दाम नियंत्रित करने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी है। यह आयात शुल्क दर कोटा (TRQ) के तहत 31 अक्टूबर 2026 तक किया जा सकेगा। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की आपूर्ति बढ़ाना और कीमतों में तेजी पर अंकुश लगाना है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने गुरुवार को जारी अधिसूचना में कच्ची चीनी की आयात नीति में बदलाव की जानकारी दी। अधिसूचना के अनुसार, टीआरक्यू व्यवस्था के तहत 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख टन कच्ची चीनी का बिना किसी शुल्क के आयात किया जा सकेगा।
उद्योग से जुड़े एक संगठन के मुताबिक, चीनी की कीमतों में तेजी के बीच सरकार ने यह फैसला लिया है। 2026-27 चीनी सत्र शुरू होने से पहले शुरुआती स्टॉक कम होने के कारण मिल-गेट कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। मंगलवार को देशभर में चीनी की औसत मिल-गेट कीमत 5,400 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह करीब 3,900 रुपये प्रति क्विंटल थी।
खुदरा बाजार में भी चीनी के दाम बढ़े हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 18 अगस्त तक चीनी की औसत खुदरा कीमत सालाना आधार पर करीब 13 प्रतिशत बढ़कर 52.30 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। पिछले साल इसी अवधि में यह कीमत 46.34 रुपये प्रति किलोग्राम थी।
अगस्त से नवंबर के बीच देश में चीनी की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है। इस दौरान गणेश चतुर्थी, दशहरा और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहार होने के कारण खपत में तेजी आती है। ऐसे में सरकार का शुल्क-मुक्त आयात का फैसला बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और त्योहारी सीजन में कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए अहम माना जा रहा है।
चीनी की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने बड़े उपभोक्ताओं के स्टॉक पर भी सीमा तय की है। जिन उपभोक्ताओं की मासिक चीनी खपत 10 टन से अधिक है, उनके लिए स्टॉक सीमा 15 दिनों की खपत के बराबर निर्धारित की गई है। सरकार को उम्मीद है कि आयात और स्टॉक सीमा जैसे कदमों से घरेलू बाजार में आपूर्ति संतुलित रखने तथा चीनी की कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी रोकने में मदद मिलेगी।