Summer express, मोनिका रावत, चंडीगढ़। चंडीगढ़ में किसानों की जमीन के कलेक्टर रेट और प्रशासन की ओर से जमीन की नीलामी दरों को लेकर चंडीगढ़ पेंडू विकास मंच ने सवाल उठाए हैं। मंच के प्रधान सतिंदर सिद्धू ने आरोप लगाया कि किसानों से जमीन अधिग्रहण के समय उन्हें बेहद कम मुआवजा दिया जाता है, जबकि उसी जमीन को विकसित करने के बाद प्रशासन करोड़ों रुपये में बेच रहा है। उन्होंने इस मामले में किसानों और जमीन मालिकों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया है।
सतिंदर सिद्धू ने कहा कि ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) ने सेक्टर-62, मोहाली में करीब 27 एकड़ जमीन की नीलामी लगभग 67 करोड़ रुपये प्रति एकड़ की दर से की है। दूसरी ओर चंडीगढ़ प्रशासन किसानों से अधिग्रहित जमीन पर प्लॉट और अन्य व्यावसायिक साइटें विकसित कर उन्हें करोड़ों रुपये में नीलाम कर रहा है। उन्होंने सेक्टर-39 स्थित मंडी की साइटों की नीलामी का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां साइटों का आरक्षित मूल्य करीब 5.50 करोड़ रुपये से शुरू होने की बात सामने आई है।
गांव की जमीन का कलेक्टर रेट कृषि आधार पर क्यों
मंच प्रधान ने सवाल किया कि जब गांवों की जमीन का इस्तेमाल विकास कार्यों के लिए किया जा रहा है और विकसित जमीन की कीमत करोड़ों रुपये में तय की जा रही है तो गांवों में बची जमीन का कलेक्टर रेट कृषि भूमि के आधार पर क्यों तय किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में कृषि गतिविधियों और खेती योग्य जमीन की स्थिति भी पहले जैसी नहीं रही है। ऐसे में जमीन के कलेक्टर रेट तय करने की मौजूदा व्यवस्था पर पुनर्विचार होना चाहिए।
न लैंड पूलिंग का लाभ मिला, न प्लॉट में आरक्षण
सतिंदर सिद्धू ने कहा कि चंडीगढ़ के किसानों की जमीन अधिग्रहित होने के बाद उन्हें न तो लैंड पूलिंग पॉलिसी का लाभ मिला और न ही विकसित होने वाले प्लॉटों के आवंटन में कोई आरक्षण दिया गया। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ के 28 गांवों में से अधिकांश का स्वरूप तेजी से बदल चुका है और कई गांव विकास परियोजनाओं की वजह से लगभग उजड़ चुके हैं। बचे हुए गांव भी लगातार विकास के दबाव में हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों के पुनर्वास और उनके भविष्य को लेकर प्रशासन के पास कोई स्पष्ट नीति नहीं है। न ही चंडीगढ़ में किसानों के लिए प्रभावी लैंड पूलिंग पॉलिसी लागू की गई है।
अधिकारियों से किसानों को हक देने की अपील
पेंडू विकास मंच ने चंडीगढ़ के मुख्य सचिव, वित्त सचिव, गृह सचिव और उपायुक्त से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। सिद्धू ने कहा कि प्रशासन को जमीन की वास्तविक बाजार कीमत और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए नीति तैयार करनी चाहिए, ताकि किसानों और जमीन मालिकों के साथ किसी तरह का अन्याय न हो। उन्होंने अधिकारियों से पारदर्शी व्यवस्था अपनाने और किसी भी प्रकार के विवाद या घोटाले की आशंका को खत्म करने की अपील की।
सिद्धू ने चंडीगढ़ के गांववासियों से भी इस मुद्दे पर एकजुट होकर अपनी आवाज उठाने की अपील की।