समर न्यूज | चंडीगढ़/नई दिल्ली
पंजाब के तरनतारन जिले में चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री स्वर्गीय बूटा सिंह के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक एवं आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने सख्त रुख अपनाया है।
आयोग ने संबंधित अधिकारियों को मामले में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की गिरफ्तारी के लिए तत्काल कदम उठाने और इसकी कार्रवाई की स्थिति रिपोर्ट पांच दिनों के भीतर आयोग को सौंपने की अनुशंसा की है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना की अध्यक्षता में मामले की सुनवाई हुई। पंजाब पुलिस की ओर से डीएसपी हरप्रीत सिंह तथा डीएसपी, ईओ एवं साइबर क्राइम गुलजार सिंह सुनवाई में उपस्थित रहे।
याचिकाकर्ता और स्वर्गीय बूटा सिंह के पुत्र सरबजोत सिंह भी आयोग के समक्ष मौजूद रहे।
दोनों पक्षों को सुनने और उपलब्ध रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद आयोग ने पिछली सुनवाई में दिए गए निर्देशों के बावजूद जांच में देरी, आरोपियों की गिरफ्तारी न होने और कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं किए जाने पर गंभीर चिंता जताई।
आयोग के अनुसार, पांच मई को हुई पिछली सुनवाई में मामले की जांच निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी करने की अनुशंसा की गई थी। इसके अलावा सरबजोत सिंह की ओर से कथित आरोपियों से धमकी भरे फोन कॉल मिलने की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने उन्हें और उनके आश्रितों को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 15ए के तहत सुरक्षा देने के निर्देश दिए थे। आयोग ने संबंधित अधिकारियों से 30 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी थी।
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि उसके पूर्व निर्देशों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई रिपोर्ट अब तक प्राप्त नहीं हुई है। लगातार हो रही देरी को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने संबंधित अधिकारियों को कानून के अनुसार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाने की अनुशंसा की। साथ ही गिरफ्तारी के संबंध में की गई कार्रवाई की स्थिति पांच दिनों के भीतर आयोग को देने को कहा है।
आयोग ने जांच जल्द पूरी कर सक्षम न्यायालय के समक्ष बिना किसी और अनावश्यक देरी के आरोप-पत्र दाखिल करने की भी अनुशंसा की है। इसके अलावा जांच और गिरफ्तारी में हुई देरी के लिए जिम्मेदारी तय करने की बात कही गई है। आयोग ने कहा कि यदि जांच अधिकारी या संबंधित अधिकारियों की ओर से कर्तव्य निर्वहन में जानबूझकर लापरवाही सामने आती है तो कानून के अनुसार विभागीय कार्रवाई की जाए। साथ ही अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 4 के तहत कार्रवाई पर भी विचार करने को कहा गया है।
याचिकाकर्ता को सुरक्षा देने की अनुशंसा
सरबजोत सिंह की सुरक्षा के मुद्दे को भी आयोग ने गंभीरता से लिया। कथित धमकियों को देखते हुए आयोग ने पंजाब और दिल्ली, दोनों स्थानों पर उन्हें और उनके आश्रितों को तत्काल और पर्याप्त पुलिस सुरक्षा देने की अनुशंसा की है। आयोग ने कहा कि पीड़ितों, शिकायतकर्ताओं, गवाहों और उनके आश्रितों की सुरक्षा महत्वपूर्ण वैधानिक संरक्षण है। संबंधित अधिकारियों का दायित्व है कि याचिकाकर्ता बिना भय, दबाव, धमकी या प्रताड़ना के मामले को आगे बढ़ा सके।
30 दिन में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी
आयोग ने अपनी अनुशंसाओं पर 30 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। आयोग ने जांच और गिरफ्तारी में अनावश्यक देरी पर जवाबदेही तय करने की भी अनुशंसा की है। यदि संबंधित अधिकारियों की ओर से जानबूझकर लापरवाही पाई जाती है तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है।
विवाद होने पर वड़िंग ने मांगी थी माफी
तरनतारन में चुनाव प्रचार के दौरान राजा वड़िंग ने पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री स्वर्गीय बूटा सिंह का जिक्र करते हुए कथित तौर पर उनके रंग पर टिप्पणी की थी और कहा था कि इसके बावजूद कांग्रेस ने उन्हें देश का गृहमंत्री बनाया। उनके बयान के बाद अनुसूचित जाति समुदाय और विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। बूटा सिंह के पुत्र सरबजोत सिंह ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू हुई। विवाद बढ़ने के बाद राजा वड़िंग ने बूटा सिंह के संबंध में की गई टिप्पणी पर बिना शर्त माफी भी मांगी थी।