summer express, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश के पांच राज्यों में रेल नेटवर्क को मजबूत करने और व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही को सुचारू बनाने के लिए 10,783 करोड़ रुपये की लागत वाली सात परियोजनाओं को मंजूरी दी है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि इन परियोजनाओं के तहत कुल 656 किलोमीटर नई रेलवे लाइनें बिछाई जाएंगी।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य मौजूदा रेल मार्गों पर बढ़ते यातायात के दबाव को कम करना और यात्री तथा मालगाड़ियों के संचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध कराना है। परियोजनाओं का विस्तार पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों में होगा। इससे करीब 14 जिलों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही लगभग 4,790 गांवों तक बेहतर रेल संपर्क पहुंचेगा और करीब 56 लाख की आबादी को इसका फायदा मिलेगा।
सरकार ने खड़गपुर-झारसुगुड़ा रेल खंड में बागदेही तक चौथी लाइन के निर्माण को मंजूरी दी है। इसके अलावा कटनी-पेंड्रा रोड खंड पर भी चौथी रेल लाइन विकसित की जाएगी। बिलासपुर यानी उसलापुर से पेंड्रा रोड के बीच तीसरी लाइन बिछाने की योजना भी स्वीकृत की गई है। ये मार्ग पहले से ही भारी रेल यातायात वाले क्षेत्रों में शामिल हैं, इसलिए अतिरिक्त लाइनों के निर्माण से ट्रेनों के संचालन में काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
रेल मंत्री ने बताया कि इन परियोजनाओं से रेलवे नेटवर्क की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होने से यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा। इससे व्यस्त मार्गों पर ट्रेनों को एक-दूसरे के लिए लंबे समय तक इंतजार कराने की स्थिति भी कम हो सकती है।
नई रेल लाइनों का फायदा माल ढुलाई के क्षेत्र में भी मिलेगा। रेलवे की क्षमता बढ़ने से उद्योगों के लिए कच्चा माल और तैयार उत्पाद एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना आसान होगा। इससे माल परिवहन की गति बढ़ाने के साथ मौजूदा रेल लाइनों पर दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी।
रेलवे परियोजनाओं से पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से पुरी के जगन्नाथ मंदिर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, अमरकंटक, अचानकमार टाइगर रिजर्व, तारातारिणी मंदिर और रतनपुर के महामाया मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। इससे तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने के साथ इन क्षेत्रों के स्थानीय व्यापार और रोजगार को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।