द्रंग में विकास की कीमत चुका रहे दो परिवार, पहले एनएच निर्माण में खोया घर, अब नए मकान भी हुए क्षतिग्रस्त
मंडी/धर्मवीर-:विकास के लिए जमीन और घर छोड़ने का दर्द मंडी जिला के द्रंग गांव के दो परिवारों से बेहतर शायद ही कोई समझ सकता है। इन परिवारों ने पहले मंडी-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के लिए अपने पुश्तैनी आशियाने खोए। मुआवजा मिलने के बाद बड़ी मुश्किल से नए घर बनाए, लेकिन कुछ समय बाद उसी हाईवे के डंगे के धंसने से ये नए आशियाने भी क्षतिग्रस्त हो गए। अब दोनों परिवार किराए के कमरों में रहने को मजबूर हैं और तीसरी बार घर बसाने के लिए मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं।
मंडी जिला के पधर उपमंडल का द्रंग गांव… यहां धर्मा देवी और देवेंद्र सिंह के परिवारों के लिए विकास किसी सौगात से कम नहीं, लेकिन इसकी कीमत उन्होंने अपने घरों से चुकाई है। पहले राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के दौरान उन्हें अपने बसे-बसाए घर छोड़ने पड़े। सरकार से मिली मुआवजा राशि और अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर दोनों परिवारों ने दूसरी जगह नए मकान बनाए।
उम्मीद थी कि अब जिंदगी पटरी पर लौट आएगी। नए घर में परिवारों ने कुछ समय ही बिताया था कि हाईवे के एक हिस्से में बने विशाल डंगे के क्षतिग्रस्त होने से हालात फिर बदल गए। डंगा धंसने से आसपास के दो मकानों को नुकसान पहुंचा और परिवारों को दोबारा अपने घर खाली करने पड़े।अब टूटे हुए मकानों को देखकर प्रभावित परिवारों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि दूसरी बार घर बनाने में उनकी पूरी जमा पूंजी खर्च हो चुकी है। ऐसे में दोबारा मकान बनाने की आर्थिक क्षमता उनके पास नहीं है। प्रभावित धर्मा देवी, देवेंद्र सिंह और अनीता कटारिया ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि क्षतिग्रस्त मकानों का दो गुणा मुआवजा दिया जाए, ताकि वे किसी सुरक्षित स्थान पर फिर से अपना आशियाना बना सकें।
वहीं, मामले को लेकर एनएचएआई का कहना है कि हाईवे के एक कलवर्ट के पास पानी के रिसाव के कारण डंगे को नुकसान पहुंचा, जिसकी वजह से दो मकान प्रभावित हुए हैं। नुकसान का आकलन करने के लिए मंडी उपायुक्त की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। कमेटी घटनास्थल का निरीक्षण कर चुकी है और अब क्षति का मूल्यांकन किया जा रहा है। मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रभावितों ने मांगा दो गुना मुआवजा
प्रभावित परिवारों के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित छत की है। हालांकि हाईवे निर्माण कर रही गावर कंस्ट्रक्शन लिमिटेड ने मानवीय पहल करते हुए दोनों परिवारों को किराए के कमरों में रहने के लिए आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है। कंपनी के जीएम विकास नागर के अनुसार दोनों परिवारों को 8 हजार रुपये प्रतिमाह किराया दिया जा रहा है। कंपनी ने मुआवजा मिलने के छह महीने बाद तक किराया जारी रखने की
पहले विकास के लिए घर छोड़ा, फिर मुआवजे से नया आशियाना बनाया और अब उसी हाईवे के कारण वह भी सुरक्षित नहीं रहा। ऐसे में प्रभावित परिवारों की निगाहें अब प्रशासन की कमेटी की रिपोर्ट और मुआवजे के फैसले पर टिकी हैं। उम्मीद है कि नुकसान का निष्पक्ष आकलन कर जल्द राहत दी जाएगी, ताकि ये परिवार तीसरी बार अपने लिए एक सुरक्षित आशियाना बना सकें।