लेफ्टिनेंट बनकर अल्का पठानिया ने बढ़ाया क्षेत्र का मान, गांव पहुंचने पर हुआ भव्य स्वागत
Summer express/कांगड़ा, संजीव -:फतेहपुर क्षेत्र की बेटी अल्का पठानिया ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। सैन्य अधिकारी बनने के बाद जब अल्का पहली बार अपनी जन्मभूमि लाड़थ बाड़ी पहुंचीं तो परिवार और ग्रामीणों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। सेना की वर्दी में बेटी को देखकर पिता बलवीर सिंह पठानिया की आंखें खुशी और गर्व से नम हो गईं।लाड़थ बाड़ी में अल्का के स्वागत का माहौल भावुक कर देने वाला रहा। परिजनों, ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने फूल-मालाओं और गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया। गांव की बेटी की इस उपलब्धि को ग्रामीणों ने पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण बताया।
अल्का पठानिया ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और परिवार को दिया। उन्होंने कहा कि सेना में अधिकारी बनना उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने क्षेत्र की बेटियों को संदेश देते हुए कहा कि लक्ष्य निर्धारित कर पूरी मेहनत और लगन के साथ आगे बढ़ना चाहिए। परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, हार नहीं माननी चाहिए।अल्का ने अपनी प्रारंभिक से लेकर 12वीं कक्षा तक की शिक्षा लाड़थ बाड़ी में पूरी की। इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई की और पीटीयू जालंधर से एमटेक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने सेना में अधिकारी बनने का लक्ष्य तय किया और लगातार मेहनत करती रहीं।
अल्का के पिता बलवीर सिंह पठानिया स्वयं सेना से सेवानिवृत्त हैं। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने शिक्षा विभाग में प्रधानाचार्य के रूप में भी सेवाएं दीं। वहीं उनकी माता रजनी पठानिया गृहिणी हैं। ऐसे सैन्य पृष्ठभूमि वाले परिवार में बेटी का भारतीय सेना में अधिकारी बनना परिवार के लिए विशेष खुशी का अवसर है।पिता बलवीर सिंह पठानिया ने कहा कि बेटी को लेफ्टिनेंट की वर्दी में देखकर जो गर्व और खुशी महसूस हो रही है, उसे शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि अल्का ने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है और उन्हें उम्मीद है कि उसकी सफलता क्षेत्र की अन्य बेटियों को भी बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित करेगी।अल्का पठानिया की सफलता ने लाड़थ बाड़ी के साथ पूरे फतेहपुर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। उनकी उपलब्धि युवाओं के लिए संदेश है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और निरंतर प्रयास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।