6 अक्तूबर को सरकारी गवाह होंगे पेश, तीन शूटरों को पहले ही हो चुकी है उम्रकैद
सागर पाहवा | मोहाली
समर न्यूज़
यूथ अकाली दल नेता विक्रमजीत सिंह उर्फ वि्क्की मिड्डूखेड़ा हत्याकांड में पांच साल बाद भी कानूनी कार्रवाई का सिलसिला जारी है। मोहाली की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने अब खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) से जुड़े बताए जा रहे धर्मिंदर सिंह उर्फ गुगनी के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं।
गुगनी इस समय पटियाला जेल में बंद है। अदालत ने मामले में सरकारी गवाहों को 6 अक्तूबर को पेश करने के निर्देश दिए हैं। जून 2026 में मोहाली पुलिस ने गुगनी के खिलाफ इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी।
मिड्डूखेड़ा की 7 अगस्त 2021 को मोहाली के सेक्टर-71 क्षेत्र में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह एक प्रॉपर्टी डीलर के कार्यालय से निकलकर अपनी एसयूवी की ओर जा रहे थे, तभी हमलावरों ने उन पर गोलियां चला दी थीं। पुलिस जांच में सामने आया था कि हमलावरों ने वारदात को अंजाम देने के लिए पहले उनकी रेकी की थी।
तीन शूटरों को उम्रकैद, तीन आरोपी बरी
इस मामले में अदालत अजय कुमार उर्फ लेफ्टी, सज्जन सिंह उर्फ भोलू और अनिल कुमार उर्फ लट्ठ को हत्या का दोषी ठहरा चुकी है। जनवरी 2025 में तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इनके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत भी सात-सात साल की सजा हुई थी। वहीं कौशल चौधरी, अमित डागर और भूपिंदर सिंह उर्फ भूपी राणा को अदालत ने सीधे तौर पर पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण बरी कर दिया था। अदालत के इस फैसले में तीनों के खिलाफ हत्या की साजिश से जुड़ा आरोप साबित नहीं हो सका।
पांच साल बाद भी कई कड़ियां अधूरी
पुलिस की जांच में आर्मेनिया में मौजूद बताए गए गौरव उर्फ लक्की पडियाल और ऑस्ट्रेलिया में बताए गए शगनप्रीत सिंह समेत अन्य आरोपियों के नाम सामने आए थे। इनकी गिरफ्तारी न होने के कारण इनके खिलाफ अलग कार्रवाई/पूरक चार्जशीट का मामला लंबित रहा। 2026 में गुगनी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब उसके मामले में ट्रायल आगे बढ़ेगा। पुलिस के पुराने जांच रिकॉर्ड के अनुसार, तीनों शूटरों को मोहाली लाने, ठहराने और रेकी से जुड़ी कड़ियों में शगनप्रीत सिंह का नाम भी सामने आया था। हालांकि, इस मामले में अलग-अलग आरोपियों की भूमिका पर अदालत के निष्कर्ष अलग रहे हैं—तीन शूटर दोषी ठहराए गए, जबकि कौशल चौधरी, अमित डागर और भूपी राणा बरी हो चुके हैं।