लक्की मेहता | लुधियाना
समर न्यूज
लुधियाना में पार्कों की हरियाली और रखरखाव को लेकर नगर निगम की हॉर्टिकल्चर ब्रांच की व्यवस्था सवालों के घेरे में है। शहर में करीब 925 पार्क हैं, जबकि निगम के पास करीब 473 माली बताए जा रहे हैं। इसके बावजूद कई पार्कों की हालत खराब है। इससे भी बड़ा सवाल यह है कि उपलब्ध मालियों में से कितने वास्तव में पार्कों में ड्यूटी कर रहे हैं?
निगम के 473 मालियों में 114 रेगुलर, 103 कॉन्ट्रैक्ट और 205 आउटसोर्स कर्मचारी हैं। सूत्रों का दावा है कि करीब 51 माली पार्कों की बजाय अलग-अलग जोनों और ब्रांचों में लगाए गए हैं। कुछ से ड्राइवरों, पियनों और अफसरों के घरों में माली का काम लिए जाने की बात सामने आई है। जोन-डी में एक माली को चौकीदार की ड्यूटी देने का दावा किया जा रहा है।
{पार्कों के माली बने ‘ऑलराउंडर: सूत्रों के मुताबिक कई मालियों से उनकी मूल जिम्मेदारी से अलग कंप्यूटर ऑपरेटर, क्लर्क, सेवादार और डाक पहुंचाने तक का काम लिया जा रहा है। सवाल यह है कि जब माली पार्कों में पौधों, घास और सफाई की देखभाल के बजाय दूसरे कामों में लगाए जाएंगे तो शहर के पार्कों की हरियाली कौन संभालेगा? हॉर्टिकल्चर ब्रांच के पास करीब 22 ट्रैक्टर भी बताए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इन्हें चलाने वाले ड्राइवर भी माली कैडर से ही हैं। यानी पार्कों की देखभाल के लिए उपलब्ध मैनपावर का एक हिस्सा ट्रैक्टर संचालन और दूसरे गैर-पार्क कार्यों में इस्तेमाल हो रहा है।
{650 पार्क पीएमसी के पास, फिर निगम के माली क्यों?… शहर के करीब 650 पार्कों का रखरखाव पार्क मैनेजमेंट कमेटी (पीएमसी) के जिम्मे बताया गया है। इसके लिए करीब 2.50 रुपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से भुगतान किया जाता है। इसके अलावा करीब 40 पार्कों का रखरखाव निजी कंपनियों द्वारा किया जा रहा है। यहीं व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल उठता है। जब 650 पार्क पीएमसी के हवाले हैं और रखरखाव का भुगतान भी किया जा रहा है, तो पार्क में समस्या आने पर निगम के हॉर्टिकल्चर माली ही क्यों दौड़ते हैं? सूत्रों का आरोप है कि कई मामलों में पीएमसी की ओर से जिम्मेदारी निभाने के बजाय निगम के मालियों को ही काम पर लगा दिया जाता है।
{2.50 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र, लेकिन मैनपावर का हिसाब साफ नहीं… 925 पार्कों का कुल क्षेत्र करीब 2.50 लाख वर्ग मीटर बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक एक पार्क के उचित रखरखाव के लिए कम से कम एक माली की जरूरत होती है। ऐसे में निगम को यह सार्वजनिक करना चाहिए कि इतने बड़े क्षेत्र में वास्तविक रूप से कितने माली रोजाना पार्कों में तैनात रहते हैं और कितने कर्मचारी दूसरे कामों में लगाए गए हैं।
{जोन-डी में पीएमसी के नाम पर 469 का आंकड़ा… उपलब्ध विवरण के अनुसार जोन-ए में कुल 73 माली हैं, जिनमें 40 पीएमसी और 33 निगम के बताए गए हैं। जोन-बी में कुल 213 में 107 पीएमसी, 96 निगम और 10 फ्री ऑफ कॉस्ट बताए गए हैं। जोन-सी में कुल 50 में 31 पीएमसी, 17 निगम और 2 फ्री ऑफ कॉस्ट हैं। जोन-डी में कुल 589 का आंकड़ा बताया गया है, जिसमें 469 पीएमसी, 105 निगम और 15 फ्री ऑफ कॉस्ट शामिल हैं। इन आंकड़ों के बावजूद पार्कों की स्थिति पर सवाल उठना बताता है कि सिर्फ कर्मचारियों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी तैनाती, निगरानी और काम की जवाबदेही भी जांच का विषय है। {पैसा पीएमसी को, काम निगम के मालियों से तो फिर जवाबदेह कौन?… सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पीएमसी को पार्कों के रखरखाव के लिए नियमित भुगतान हो रहा है और निगम के पास अलग हॉर्टिकल्चर स्टाफ भी है, तो दोनों व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी और निगरानी स्पष्ट क्यों नहीं है? नगर निगम को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि पीएमसी को किए जा रहे भुगतान के बदले पार्कों में कितनी बार निरीक्षण होता है, खराब रखरखाव पर कितनी कार्रवाई हुई और निगम के कितने माली वास्तव में पार्कों के लिए उपलब्ध हैं। शहर के पार्कों पर पैसा भी खर्च हो रहा है, पीएमसी भी है और माली भी; इसके बावजूद अगर पार्क बदहाल हैं तो मामला सिर्फ हरियाली का नहीं, बल्कि पूरे रखरखाव सिस्टम की जवाबदेही का है।