समर न्यूज | चंडीगढ़
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में 14 विभिन्न ठिकानों पर सघन छापेमारी की। यह अहम कार्रवाई 645 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन के कथित गबन से जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) की विस्तृत जांच के सिलसिले में की गई है। लूटी गई यह भारी-भरकम राशि मुख्य रूप से हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ नगर निगम और अन्य सरकारी विभागों के बैंक खातों से संबंधित है।
ईडी के चंडीगढ़ जोनल ऑफिस-2 ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के कड़े प्रावधानों के तहत यह तलाशी अभियान चलाया है। इस पूरी जांच की नींव हरियाणा पुलिस द्वारा फरवरी 2026 में दर्ज की गई एक एफआईआर (प्राथमिकी) के आधार पर रखी गई थी। यह एफआईआर विशेष रूप से हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में मौजूद खातों के बैलेंस में पाई गई भारी विसंगतियों के संबंध में दर्ज की गई थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस सुनियोजित घोटाले में कई बड़े आभूषण कारोबारी (ज्वैलर्स) और उनसे जुड़ी संस्थाएं सीधे तौर पर शामिल हैं। ईडी की छापेमारी जिन प्रमुख व्यावसायिक स्थानों पर हुई, उनमें मलिक ज्वैलर्स, केएलजी ज्वेल्स और उसकी सहयोगी संस्थाएं, एमबी गोल्ड ट्रेडर्स, शाम ज्वैलर्स और सुंदर ज्वैलर्स के नाम शामिल हैं। इसके अलावा जांच एजेंसी ने गौरव कंसल नाम के एक व्यक्ति के ठिकानों पर भी दबिश दी। ईडी का आरोप है कि कंसल ने अपराध से प्राप्त आय को रूट करने और उसकी लेयरिंग करने में एक मुख्य बिचौलिए की भूमिका निभाई।
कई अहम सुराग और गुप्त दस्तावेज मिले: छापेमारी के दौरान अधिकारियों को कई अहम सुराग और गुप्त दस्तावेज मिले हैं। ईडी की अब तक की जांच से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि गबन किए गए इस सार्वजनिक धन को विभिन्न ज्वैलर्स के बैंक खातों के माध्यम से सिस्टम में घुमाया गया। इसके बाद इसे बिल्कुल वैध व्यापारिक लेनदेन के रूप में पेश करने की कोशिश की गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ये सारे लेनदेन आरोपियों की गहरी मिलीभगत से किए गए थे ताकि अवैध रूप से कमाए गए धन को साफ सुथरा दिखाया जा सके।
काले धन को सफेद करने का आरोप: इस मामले की गंभीरता इस तथ्य से और भी बढ़ जाती है कि ज्वैलर्स द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए सफेद किए गए इस काले धन का एक बड़ा हिस्सा कथित तौर पर उन आरोपी आईएएस अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों तक भी पहुंचा, जो आईडीएफसी फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी में शामिल थे।
इस व्यापक भ्रष्टाचार के संदर्भ में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) भी समानांतर कानूनी कार्रवाई कर रहा है। सीबीआई ने पंचकूला की विशेष अदालत में अपनी तीसरी चार्जशीट दायर कर दी है, जिसमें इस बैंक धोखाधड़ी मामले में हरियाणा कैडर के छह वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों को सीधे तौर पर नामजद किया गया है। यह ताजा छापेमारी ईडी के जारी अभियान का ही एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है ईडी: इससे पहले, इसी हाई-प्रोफाइल मामले में ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए जांच एजेंसी ने अब तक लगभग 211 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को कुर्क और सीज (जब्त) भी किया है।
इसके साथ ही, ईडी की ओर से पंचकूला की विशेष पीएमएलए अदालत में 14 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत भी दर्ज की जा चुकी है। बरामद दस्तावेजों की गहन जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े कई और बड़े चेहरे बेनकाब होने की संभावना है।