अर्शदीप सिंह समर | फगवाड़ा/चंडीगढ़
पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में छात्र विरोध प्रदर्शन के हिंसक रूप लेने के बाद राज्य में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विरोध प्रदर्शन की शुरुआत एक छात्रा के साथ कथित यौन अपराध की सोशल मीडिया पर फैली सूचना के बाद हुई थी। पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया है, लेकिन जांच में अभी तक आरोप की पुष्टि नहीं हुई है।
विश्वविद्यालय ने भी घटना के संबंध में चल रही अफवाहों पर छात्रों से संयम बरतने की अपील की है। रविवार को प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया और परिसर में तोड़फोड़, आगजनी तथा पुलिस के साथ झड़प की घटनाएं हुईं। प्रदर्शनकारियों ने जालंधर-फगवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग-44 को कई घंटों तक अवरुद्ध रखा।
कुछ पुलिस वाहनों और परिसर की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। सोमवार को स्थिति नियंत्रण में आने के बाद भारी पुलिस बल तैनात रहा और राजमार्ग पर यातायात बहाल कर दिया गया। विश्वविद्यालय ने 10 दिनों के लिए कक्षाएं स्थगित कर दी हैं तथा मध्यावधि परीक्षाएं अगले आदेश तक टाल दी हैं। बड़ी संख्या में छात्र अपने घरों को लौट गए हैं। शिरोमणि अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने आरोप लगाया कि एलपीयू के संस्थापक एवं राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल के आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में जाने के बाद उन्हें निशाना बनाने के लिए कथित तौर पर माहौल तैयार किया गया। उन्होंने घटना की स्वतंत्र जांच की मांग की। अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी आरोप लगाया कि छात्रों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई में इस्तेमाल किया गया।
भाजपा के वरिष्ठ नेता सुनील जाखड़ ने मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी से कराने की मांग करते हुए कहा कि परिसर में कथित तौर पर बाहरी लोगों की मौजूदगी और उनके हथियारों के साथ दिखाई देने की बातों की जांच होनी चाहिए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल ढिल्लों ने पंजाब सरकार को कानून-व्यवस्था के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने छात्रों की मांगों को जायज बताते हुए हिंसा की जांच की जरूरत पर जोर दिया। पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने एलपीयू परिसर का दौरा कर कहा कि आगजनी और तोड़फोड़ में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। जांच वैज्ञानिक तरीके से की जा रही है और दोषी पाए जाने पर विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े लोगों समेत किसी को भी कार्रवाई से बाहर नहीं रखा जाएगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने एलपीयू सहित निजी विश्वविद्यालयों में हुई घटनाओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि जांच से यह स्पष्ट होना चाहिए कि छात्रों के विरोध ने अचानक हिंसक रूप कैसे लिया और परिसर में बाहरी लोगों की कथित मौजूदगी कैसे हुई। पार्टी ने छात्र सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की है।
{एसआईटी के सामने कई सवाल: पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज, घटनाक्रम और सोशल मीडिया पर फैली सूचनाओं की जांच कर रही है। कथित यौन अपराध की सच्चाई, प्रदर्शन में बाहरी लोगों की संभावित भूमिका और हिंसा के दौरान संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान जांच के प्रमुख बिंदु हैं। पंजाब राज्य महिला आयोग ने भी मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए पुलिस और प्रशासन से प्राथमिकी, एसआईटी की स्थिति तथा छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी मांगी है।
{मित्तल के दल बदलने से जुड़ा विवाद: अशोक मित्तल ने अप्रैल में आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। उनके दल बदलने के बाद एलपीयू के बाहर राजनीतिक विरोध भी हुआ था। मौजूदा हिंसा को उनके राजनीतिक बदलाव से जोड़कर विपक्षी नेताओं ने जो आरोप लगाए हैं, वे फिलहाल राजनीतिक दावे हैं। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हिंसा के पीछे कोई संगठित साजिश थी या विरोध के दौरान परिस्थितियां स्वत: नियंत्रण से बाहर हुईं।
{सीएम मान बोले- दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई: मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एलपीयू में हुए घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए पुलिस महानिदेशक गौरव यादव को मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। सरकार ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर विशेष जांच दल गठित किया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर डीजीपी ने विश्वविद्यालय परिसर का दौरा भी किया। पुलिस ने कहा है कि हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाएगी तथा किसी संभावित साजिश की भी पड़ताल होगी।
{एलपीयू ने कहा- अफवाहों और बाहरी लोगों से बिगड़े हालात: एलपीयू प्रशासन ने कथित दुष्कर्म और छात्रा की आत्महत्या से जुड़ी सोशल मीडिया पर चल रही सूचनाओं को गलत बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसी घटना की पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन के अनुसार, सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों और परिसर में बाहरी लोगों के प्रवेश से स्थिति बिगड़ी तथा बाद में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं। विश्वविद्यालय की प्रो-चांसलर डॉ. रश्मि मित्तल ने विद्यार्थियों से अफवाहों पर भरोसा न करने और आधिकारिक जानकारी पर ध्यान देने की अपील की। हिंसा के बाद विश्वविद्यालय ने 10 दिनों के लिए कक्षाएं स्थगित कर दी हैं और मध्यावधि परीक्षाएं अगले आदेश तक टाल दी गई हैं।