समर न्यूज। अमृतसर
पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से जुड़े मामलों में सख्त कानूनी प्रावधानों वाले ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर सरकार और सिख संस्थाओं के बीच औपचारिक बातचीत का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है।
पंजाब सरकार ने अकाल तख्त के जत्थेदार को सात सदस्यीय समिति के गठन और उसके अधिकार क्षेत्र की औपचारिक जानकारी दे दी है। सरकार ने दोनों समितियों के बीच समन्वय के लिए पीसीएस अधिकारी हरजीत सिंह संधू को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने हाल में सात सदस्यीय समिति के साथ करीब दो घंटे बैठक की। बैठक को मुख्य रूप से परिचयात्मक बताया गया है। समिति अब पहले अपने स्तर पर कानून के प्रावधानों और उठाई गई आपत्तियों पर चर्चा करेगी। इसके बाद अकाल तख्त की ओर से गठित पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सरकारी समिति की औपचारिक बैठक अगले महीने होने की संभावना है।
समिति में कौन-कौन
सरकार की सात सदस्यीय समिति में अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह, दमदमी टकसाल प्रमुख संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा, रामपुर खेड़ा के संत बाबा सेवा सिंह, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति जसपाल सिंह, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति गुरबीर सिंह, पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं पंजाब लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष जतिंदर सिंह औलख और कानून अधिकारी प्रीत इंदर पाल सिंह शामिल हैं। समिति को कानून से जुड़े मुद्दों पर सुझाव और रिपोर्ट सरकार को देने का दायित्व सौंपा गया है।
इन प्रावधानों पर आपत्ति
विवाद की शुरुआत अप्रैल में संशोधित कानून लागू होने के बाद हुई। अकाल तख्त की ओर से कानून के कई प्रावधानों पर आपत्ति जताई गई। इनमें गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों के संबंध में इस्तेमाल की गई शब्दावली, ‘कस्टोडियन’ की परिभाषा और भूमिका तथा स्वरूपों का केंद्रीय रिकॉर्ड तैयार करने जैसे प्रावधान प्रमुख हैं। अकाल तख्त से जुड़े विशेषज्ञ पैनल ने कानून की पांच धाराओं में कम से कम 10 बदलाव सुझाए हैं। इनमें ‘कस्टोडियन’ से संबंधित प्रावधान हटाने की मांग भी शामिल है।
सरकार के जवाब पर असहमति
29 जून को अकाल तख्त में सिख मंत्रियों और विधायकों की मौजूदगी के बाद सरकार को आपत्तियों पर कार्रवाई करने के लिए समय दिया गया था। पंजाब सरकार ने 29 जुलाई को अपना लिखित जवाब सौंपा, जिसे अकाल तख्त की ओर से असंतोषजनक बताते हुए स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति बनाई गई। समिति ने अगस्त में अपनी पहली बैठक के बाद सरकार से 29 जून के निर्देशों पर अनुपालन रिपोर्ट मांगी थी और कहा था कि इसके बाद ही कानून पर आगे बातचीत की जाए।
संवाद की नई पहल
अब सरकार द्वारा सात सदस्यीय समिति की औपचारिक जानकारी अकाल तख्त के जत्थेदार को दिए जाने और दोनों पक्षों के बीच समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाने से बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री मान और पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने भी संकेत दिया है कि कानून के प्रावधानों पर चर्चा और संशोधन संभव हैं, लेकिन कानून की मूल भावना को बनाए रखने पर जोर रहेगा। उम्मीद है िक मामला कुछ सुलझ सकता है।