summer express , चंडीगढ़। हरियाणा के प्रमुख तीर्थ और पर्यटन स्थलों पर अब कचरा प्रबंधन को लेकर विशेष व्यवस्था लागू की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद प्रदेश सरकार ने सालभर चलने वाली सफाई व्यवस्था तैयार की है। इसके पहले चरण में पंचकूला के मनसा देवी मंदिर, गुरुग्राम के शीतला माता मंदिर और कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर को शामिल किया गया है। इन धार्मिक स्थलों और आसपास के क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाएगी।
योजना के तहत प्रत्येक स्थल के आसपास 500 मीटर का विशेष स्वच्छता क्षेत्र निर्धारित किया जाएगा। इसमें मंदिर या पर्यटन स्थल तक पहुंचने वाले रास्ते, पार्किंग, दुकानें और आसपास के अन्य क्षेत्र भी शामिल होंगे। यहां खुले में कचरा डालने या रखने पर रोक रहेगी। प्रमुख मार्गों पर हर 50 मीटर और श्रद्धालुओं की कतार वाले स्थानों पर हर 25 मीटर की दूरी पर डस्टबिन लगाए जाएंगे। इनमें गीले, सूखे, सैनिटरी और अन्य विशेष कचरे के लिए अलग-अलग डिब्बे होंगे।
श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने या बड़े आयोजनों के दौरान अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों और कचरा उठाने वाले वाहनों की व्यवस्था की जाएगी। मंदिरों और घाटों पर फूल और पूजा सामग्री के लिए अलग कलश रखे जाएंगे। श्रद्धालुओं को फूल-निर्माल्य नदी, तालाब या अन्य जलस्रोतों में डालने की अनुमति नहीं होगी। आगे अन्य प्रमुख तीर्थ और पर्यटन स्थलों को भी इस व्यवस्था के दायरे में शामिल किया जाएगा।
बड़े आयोजनों के दौरान 100 लोगों पर कम से कम एक शौचालय सीट उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें कम से कम आधी सीटें महिलाओं के लिए होंगी। जरूरत पड़ने पर मेलों और बड़े धार्मिक आयोजनों में मोबाइल शौचालय भी लगाए जाएंगे। शौचालयों से निकलने वाले गंदे पानी और मल-गाद को निर्धारित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाना अनिवार्य होगा।
500 मीटर के दायरे में आने वाले भंडारे, लंगर, प्रसाद की दुकानें, धर्मशालाएं, होटल और ढाबे भी विशेष निगरानी के दायरे में रहेंगे। इन्हें गीले और सूखे कचरे को अलग रखना होगा और अपने स्तर पर पर्याप्त डस्टबिन की व्यवस्था करनी होगी। सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर भी रोक रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना, जमा राशि जब्त करने या अनुमति रद्द करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर अस्थायी पानी और बिजली कनेक्शन काटने का प्रावधान भी रखा गया है।
प्रशासन को आयोजन समाप्त होने के 24 घंटे के भीतर पूरा कचरा हटाना होगा। तीर्थ क्षेत्रों को सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त बनाने के साथ आसपास एक किलोमीटर के क्षेत्र में पान-तंबाकू के दाग और अन्य गंदगी की भी सफाई करनी होगी। प्रत्येक स्थल पर सात दिनों के कचरे का रिकॉर्ड रखा जाएगा। इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। बड़े आयोजनों के दौरान दिन में दो बार जियो-टैग तस्वीरों के माध्यम से सफाई व्यवस्था की निगरानी की जाएगी। कचरा फैलाने या जलाने पर मौके पर ही जुर्माना लगाया जा सकेगा।
इन तीनों स्थलों को पहले चरण में शामिल करने के पीछे यहां आने वाली भीड़ और कचरे की मात्रा प्रमुख कारण है। पंचकूला के मनसा देवी मंदिर में नवरात्र के दौरान करीब 2.48 टन कचरा निकला था, जो सामान्य दिनों की तुलना में लगभग दस गुना अधिक था। गुरुग्राम के शीतला माता मंदिर में प्रतिदिन 200 किलो से अधिक फूल निकलते हैं, जबकि त्योहारों के दौरान यह मात्रा करीब 1,000 किलो तक पहुंच जाती है। कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर पर रोजाना करीब 5 से 6 हजार श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। पूरे कुरुक्षेत्र क्षेत्र में प्रतिदिन करीब 100 टन कचरा निकलने का अनुमान है।
यह पूरी कवायद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद शुरू की गई है। कोर्ट ने 19 फरवरी 2026 को पर्यटन और तीर्थ स्थलों पर गंदगी को लेकर चिंता जताई थी। इसके बाद 5 मई 2026 को राज्यों को प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों की पहचान कर वहां विशेष कचरा प्रबंधन व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए। जिला कलेक्टरों को निगरानी के लिए विशेष प्रकोष्ठ बनाने और नियमित रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी भी दी गई है।