समर न्यूज | फतेहाबाद
सजा पूरी कर चुके बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को लेकर हरियाणा के फतेहाबाद जिले के रतिया में 5 अक्टूबर को रोष मार्च निकाला जाएगा। आयोजकों ने इसके लिए गांवों और शहर में जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है।
पिछले तीन दिनों से तीन टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर गुरुद्वारा कमेटियों और सिख संगत से मार्च में शामिल होने की अपील कर रही हैं।
आयोजकों के अनुसार, मार्च पुराना बाजार स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब से शुरू होकर तहसील कार्यालय तक जाएगा। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से सरकार को मांगपत्र सौंपा जाएगा। इसमें जेलों में बंद उन सिख कैदियों की रिहाई की मांग प्रमुख होगी, जिनके बारे में आयोजकों का कहना है कि वे अपनी सजा पूरी कर चुके हैं। आयोजकों ने इसे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने का कार्यक्रम बताया है।
जनसंपर्क अभियान के लिए गठित तीन टीमों में शामिल कार्यकर्ताओं ने रतिया के आसपास के कई गांवों का दौरा किया है।
पहली टीम ने ब्राह्मणवाला प्लाट, मिराणा ढाणी, बोड़ा और बलियाला में संपर्क किया, जबकि दूसरी टीम ने हसंगा, पांडरी, शेखपुर सौत्र और गुरुद्वारा दशमेश दरबार क्षेत्र में लोगों से मुलाकात की।
तीसरी टीम ने कमाना और आसपास के गांवों में संगत से संपर्क किया। आयोजकों का कहना है कि मार्च में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी के लिए अभियान जारी रहेगा।
{पंजाब में भी बढ़ी गतिवििध…
बंदी सिंहों की रिहाई का मुद्दा हाल के दिनों में पंजाब में भी फिर सक्रिय हुआ है। कौमी इंसाफ मोर्चा की ओर से 2 और 3 अक्टूबर को श्री फतेहगढ़ साहिब से तख्त श्री दमदमा साहिब, तलवंडी साबो तक दो दिवसीय मार्च आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न सिख संगठनों, राजनीतिक दलों, किसान संगठनों और मानवाधिकार समूहों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। अगस्त में भी चंडीगढ़ में बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए थे। एक प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ था। इसके अलावा कुरुक्षेत्र में 1 अक्टूबर को सिख संगत ने मार्च निकालकर जिला प्रशासन के माध्यम से बंदियों की रिहाई की मांग उठाई।
{हवारा की पैरोल का मुद्दा…
इस मुद्दे को अगस्त में उस समय भी प्रमुखता मिली थी, जब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से जगतार सिंह हवारा को उनकी बीमार मां से मिलने के लिए 10 दिन की पैरोल देने का आग्रह किया था। हवारा पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। हालांकि पैरोल और स्थायी रिहाई अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाओं के विषय हैं।
{कानूनी स्थिति भी महत्वपूर्ण
बंदी सिंहों की रिहाई की मांग में कई अलग-अलग मामलों में सजा काट रहे कैदी शामिल हैं। किसी कैदी की रिहाई केवल जेल में बिताए वर्षों के आधार पर स्वतः नहीं होती। संबंधित मामले में सजा, अपराध की प्रकृति, लागू कानून, दया या सजा में छूट संबंधी नियम और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय जैसे कानूनी पहलू महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए रतिया में प्रस्तावित मार्च की मांग और प्रत्येक बंदी के मामले में अंतिम कानूनी निर्णय को अलग-अलग देखना होगा।