Summer express, राकेश कुमार शर्मा, करनाल। एआई और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के दौर में भी करनाल में 122 साल पुरानी रामलीला की परंपरा आज तक कायम है। वर्ष 1904 से चली आ रही इस ऐतिहासिक परंपरा में इस बार पहली बार महिला कलाकार निशा माता सीता की भूमिका निभा रही हैं। वहीं, गुरु हरिदत्त शर्मा की चौथी पीढ़ी के अभिषेक शर्मा भगवान श्रीराम का किरदार निभाकर पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। रामलीला के माध्यम से लोगों को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और भगवान श्रीराम के आदर्शों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
श्री रामायण पाठक सभा के प्रधान पंकज गोयल ने बताया कि करनाल में रामलीला मंचन की शुरुआत वर्ष 1904 में हुई थी। देश के विभाजन के दौरान वर्ष 1947 और आपातकाल के समय वर्ष 1975 में भी इस परंपरा को जारी रखा गया। श्री रामायण पाठक सभा और श्री रामलीला सभा मिलकर इस सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। कोरोना काल में मंचन प्रभावित हुआ था, लेकिन बाद में आयोजन को दोबारा उत्साह के साथ शुरू किया गया।
इस वर्ष रामलीला में गुरु हरिदत्त शर्मा की चौथी पीढ़ी के अभिषेक शर्मा भगवान श्रीराम की भूमिका निभा रहे हैं। रामकिशन, अश्विनी और अनिल गुप्ता कलाकारों के निर्देशन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। मंचन में करीब 45 कलाकार हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें बच्चे, युवा और बुजुर्ग शामिल हैं। अलग-अलग पात्रों के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को मंच पर जीवंत किया जा रहा है।
रामलीला में इस बार महिला कलाकार निशा को माता सीता की भूमिका निभाने का अवसर मिला है। निशा ने कहा कि माता सीता का किरदार निभाना उनके लिए सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। यह भूमिका उन्हें माता सीता के त्याग, धैर्य, मर्यादा और संस्कारों को समझने का अवसर देती है। उन्होंने बताया कि वह पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ अपना किरदार निभा रही हैं।
भगवान श्रीराम की भूमिका निभा रहे अभिषेक शर्मा ने कहा कि इस ऐतिहासिक परंपरा से जुड़ना उनके लिए गर्व और सौभाग्य की बात है। गुरु हरिदत्त शर्मा की चौथी पीढ़ी के रूप में वह इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा को मंच के माध्यम से लोगों तक पहुंचाना उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी है।
आयोजकों के अनुसार, श्री रामायण पाठक सभा की ओर से रामलीला भवन में मंचन किया जा रहा है, जबकि श्री रामलीला सभा की ओर से शोभायात्रा, रावण दहन और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 16 अक्टूबर को रेलवे रोड स्थित रामलीला भवन में भगवान श्रीराम के राजतिलक का आयोजन होगा और 20 अक्टूबर को दशहरा पर्व मनाया जाएगा। इसके अलावा भरत मिलाप सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम और तीन शोभायात्राएं भी निकाली जाएंगी।
रामलीला देखने पहुंचे दर्शक नितेश ने कहा कि इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रामायण के प्रसंगों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों, पारिवारिक मूल्यों और कर्तव्य के प्रति समर्पण की सीख मिलती है।
करनाल की यह ऐतिहासिक रामलीला 122 वर्षों से शहर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बनी हुई है। बदलते समय और तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बावजूद यह आयोजन सत्य, धर्म, त्याग और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश नई पीढ़ी तक पहुंचा रहा है।