Summer express/सोलन-: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा सैनिक कल्याण मंत्री कर्नल डॉ. धनीराम शांडिल ने जिला सोलन के ढेढघराट और सलोगड़ा में स्थापित टमाटर प्यूरी प्रसंस्करण इकाइयों का शुभारम्भ किया। इन इकाइयों के माध्यम से क्षेत्र की 2105 महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है।
इस अवसर पर डॉ. शांडिल ने महिला स्वयं सहायता समूहों को बधाई देते हुए कहा कि टमाटर प्रसंस्करण इकाइयां स्थानीय किसानों और महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित करेंगी। इनसे महिलाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के बेहतर साधन उपलब्ध होंगे तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।उन्होंने कहा कि टमाटर जैसी नकदी फसल का प्रसंस्करण किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो सकता है। स्थानीय स्तर पर कृषि उपज से विभिन्न खाद्य उत्पाद तैयार होने से किसानों को अपनी उपज के विपणन के लिए अतिरिक्त अवसर मिलेंगे। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित लघु उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।
डॉ. शांडिल ने कहा कि प्रदेश सरकार कृषि, बागवानी और दुग्ध उत्पादन के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के साथ किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए भी प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि की गई है। इसके अतिरिक्त गाय और भैंस के दूध के समर्थन मूल्य में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है।उन्होंने कहा कि टमाटर प्रसंस्करण इकाइयां महिलाओं को सामूहिक उद्यमिता से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इन इकाइयों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार कर उनकी बिक्री के नए रास्ते खोले जा सकेंगे।
दो इकाइयों से जुड़ी हैं 2105 महिलाएं
प्रदेश सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से हिमाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्थापित इन इकाइयों का संचालन महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना के तहत किया जा रहा है।ढेढघराट स्थित नया सवेरा मॉडल क्लस्टर लेवल फेडरेशन की प्रसंस्करण इकाई से ग्राम पंचायत मही, क्वारग और बीशा के 33 स्वयं सहायता समूहों की 255 महिलाएं जुड़ी हैं। इस केंद्र में कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण के लिए 13 मशीनें स्थापित की गई हैं। इकाई की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के अनुसार इस पर 39 लाख 25 हजार रुपये की लागत निर्धारित की गई है।इसी प्रकार, सलोगड़ा स्थित नया सवेरा संकुल स्तरीय संघ बसाल की इकाई से क्षेत्र की 16 ग्राम पंचायतों के 200 स्वयं सहायता समूहों की 1850 महिलाएं जुड़ी हैं। इस केंद्र में भी कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण के लिए 13 मशीनें स्थापित की गई हैं। इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भी 39 लाख 25 हजार रुपये की है।
टमाटर प्यूरी, कैचअप और जैम का होगा उत्पादन
इन प्रसंस्करण इकाइयों में कृषि उत्पादों की सफाई, छंटाई, धुलाई, कटाई, पिसाई, पकाने और पैकेजिंग के लिए मशीनें स्थापित की गई हैं। यहां टमाटर प्यूरी, टमाटर कैचअप, जैम सहित अन्य खाद्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि उपज के अनुसार दूसरे प्रसंस्कृत उत्पाद भी बनाए जा सकेंगे।
तैयार उत्पादों की बाजार की मांग के अनुरूप पैकेजिंग, लेबलिंग और ब्रांडिंग पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध हो सके और उत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त हो। इससे महिला स्वयं सहायता समूहों को अपने उद्यम विकसित करने तथा स्थानीय कृषि उत्पादों को व्यावसायिक पहचान दिलाने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश पूर्व सैनिक कल्याण के उपाध्यक्ष कर्नल संजय शांडिल, पंचायत समिति कंडाघाट की अध्यक्ष इंद्रा चौहान, उपाध्यक्ष ज्ञान ठाकुर, विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि, प्रदेश कांग्रेस महासचिव रमेश ठाकुर, जिला परिषद सदस्य अमित ठाकुर, उपमंडलाधिकारी कंडाघाट गोपाल शर्मा, उपमंडलाधिकारी सोलन नीरजा शर्मा, जिला विकास अधिकारी रमेश शर्मा, संबंधित विभागों के अधिकारी, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।