Summer express, रेवाड़ी। गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने और निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल का असर पहले ही दिन दिखाई देने लगा। वीरवार से शुरू हुई हड़ताल के बीच बुधवार रात को ही कई बिजली कर्मचारी पावर सब स्टेशन छोड़कर चले गए। इसके बाद बड़ी संख्या में फीडर ट्रिप होने से जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने लगी। कई इलाकों में ब्लैकआउट जैसे हालात बनने लगे, जबकि बिजली व्यवस्था संभालने के लिए तैनात नए और ठेके पर रखे गए कर्मचारियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
हड़ताल को सफल बनाने के लिए बिजली निगम के कनिष्ठ अभियंताओं (जेई) समेत निचले स्तर के 800 से अधिक कर्मचारी काम छोड़कर चले गए। बुधवार रात करीब 10 बजे सब स्टेशन संभालने वाले कई कर्मचारी भी अपनी ड्यूटी छोड़कर चले गए। इसके बाद अधिकांश सब स्टेशनों पर होमगार्ड, पुलिसकर्मियों और प्रशिक्षु कर्मचारियों को तैनात किया गया। रात के दौरान कई सब स्टेशनों के फीडर ट्रिप होने लगे। सब स्टेशन से लेकर फील्ड तक नियमित कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण खराबी का पता लगाकर आपूर्ति बहाल करना चुनौतीपूर्ण हो गया। इसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिला।
जिन फीडरों में खराबी नहीं आई, वहां बिजली आपूर्ति सामान्य रूप से जारी रही। हालांकि, वीरवार सुबह तक बड़ी संख्या में फीडर बंद हो चुके थे। ग्रामीण इलाकों में बिजली संकट शहरों की तुलना में अधिक गंभीर हो गया। नए और अनुभवहीन कर्मचारियों के लिए बिजली लाइनों में खराबी तलाशना और उसे ठीक करना आसान नहीं रहा। लाइन की मरम्मत से पहले संबंधित सर्किट बंद करने और स्विच संचालित करने की जानकारी का अभाव भी परेशानी बढ़ा रहा है। ऐसे में बिजली आपूर्ति बहाल करने में देरी होने की आशंका बनी हुई है।
हड़ताल के दौरान उपभोक्ताओं की शिकायतें दर्ज करने के लिए जिला प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए थे। इसके बावजूद शिकायतों के निपटारे में दिक्कतें सामने आईं। वीरवार सुबह तक हेल्पलाइन पर 100 से अधिक शिकायतें पहुंच चुकी थीं, जबकि सुबह छह बजे तक बिजली निगम के पोर्टल पर भी 60 शिकायतें दर्ज की जा चुकी थीं। दिन बढ़ने के साथ शिकायतों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ और शाम तक फोन के माध्यम से मिलने वाली शिकायतें एक हजार के पार पहुंच गईं। ऐसे में हेल्पलाइन उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान करने के बजाय शिकायतें दर्ज करने तक सीमित होती नजर आई।
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल जारी रहने पर अगले दो दिनों में हालात और बिगड़ने की आशंका है। सबसे बड़ी चुनौती ट्रिप हुए फीडरों और खराब बिजली लाइनों को ठीक करने की होगी। नए कर्मचारियों को संबंधित लाइनों के स्विच और संचालन की पूरी जानकारी नहीं होने से मरम्मत कार्य प्रभावित हो सकता है। सुरक्षा मानकों के अनुसार संबंधित लाइन की बिजली आपूर्ति बंद किए बिना मरम्मत करना जोखिम भरा है। ऐसे में अनुभवी कर्मचारियों की गैरमौजूदगी बिजली व्यवस्था को सामान्य बनाने में बड़ी बाधा बन सकती है।
बिजली संकट का असर पेयजल आपूर्ति पर भी पड़ने की आशंका है। जिले में पेयजल परियोजनाओं का संचालन बिजली पर निर्भर है। यदि बिजली आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है, तो पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। हड़ताल के पहले दिन पेयजल व्यवस्था पर ज्यादा असर नहीं पड़ा, लेकिन अगले दो दिनों में स्थिति गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है। लोग एक दिन के लिए पानी का भंडारण कर सकते हैं, लेकिन लगातार तीन दिन आपूर्ति बाधित रहने से घरों और अन्य जरूरी कामों के लिए पानी की किल्लत बढ़ सकती है। ऐसे में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का असर केवल बिजली आपूर्ति तक सीमित न रहकर आमजन की दैनिक जरूरतों पर भी पड़ सकता है।