लक्की मेहता | लुधियाना
समर न्यूज
बुड्ढा दरिया को प्रदूषण मुक्त करने के दावों के बीच जमीनी हकीकत ने सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लुधियाना में रोजाना करीब 75 टन गोबर अब भी बुड्ढा दरिया में बहाया जा रहा है। डेयरियों से निकलने वाला गोबर और गंदा पानी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रहा है।
शनिवार को बल्लोके स्थित ट्रीटमेंट प्लांटों के निरीक्षण के दौरान यह स्थिति सामने आने पर राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने नगर निगम, सीवरेज बोर्ड और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद ट्रीटमेंट प्लांट निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतर रहे। विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, जबकि प्रदूषण के कारण लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है।
संत सीचेवाल ने शनिवार सुबह 8 बजे से दोपहर बाद तक शहर के लगभग सभी एसटीपी, एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) और कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) संयंत्रों का निरीक्षण किया। कई स्थानों पर डेयरी कॉम्प्लेक्स का गोमूत्र युक्त गंदा पानी सीवर लाइनों में डाला जाता मिला। इससे बल्लोके स्थित 160 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी की कार्यप्रणाली बुरी तरह प्रभावित हो रही है। प्लांट से निकलने वाले ठोस अवशेष में भी गोबर दिखाई दिया। गांव तलवाड़ा और बरनहाड़ा की पंचायतों द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित सीचेवाल मॉडल के तीनों कुएं भी गोबर से जाम मिले। संत सीचेवाल ने पंचायती विभाग के अधिकारियों को संबंधित डेयरियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
ताजपुर डेयरी कॉम्प्लेक्स में स्थिति सबसे खराब मिली। यहां अस्थायी सीचेवाल मॉडल पूरी तरह जाम था और गंदे पानी की निकासी सीधे बूढ़े दरिया में हो रही थी। जिस पानी को ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचना चाहिए था, वह तालाब में जमा होकर दरिया में बह रहा था। संत सीचेवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बिजली कनेक्शन कटने के बाद भी अवैध कुंडियां लगाकर मोटरें चलाने वाले डेयरी संचालकों पर कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि ऐसे संचालक भूजल का भी अंधाधुंध दोहन कर रहे हैं। पशुपालन विभाग को डेयरियों में दुधारू पशुओं को लगाए जा रहे इंजेक्शनों की जांच करने और पशु संरक्षण कानूनों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए। बुड्ढा दरिया की सफाई के लिए अभियान चला रहे संत सीचेवाल लंबे समय से डेयरी संचालकों से गोबर के उचित निपटान की व्यवस्था करने की अपील कर रहे हैं। अभियान के शुरुआती दो महीनों में गोबर उठाने की व्यवस्था भी स्वयं की गई थी। इसके बावजूद समस्या बनी हुई है।