अमृतसर | पंजाब के बहुचर्चित 1993 तरनतारन फर्जी एनकाउंटर केस में आखिरकार सीबीआई की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने तत्कालीन SSP, DSP और 3 अन्य पुलिस अधिकारियों को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी माना है। सभी दोषियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि सजा का ऐलान सोमवार को होगा।
किन्हें दोषी ठहराया गया?
दोषी करार दिए गए अफसरों में रिटायर्ड SSP भूपेंद्रजीत सिंह, रिटायर्ड DSP दविंदर सिंह, रिटायर्ड इंस्पेक्टर सूबा सिंह, रघुबीर सिंह और गुलबर्ग सिंह शामिल हैं। अदालत ने इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120-B (आपराधिक साजिश) के तहत दोष सिद्ध किया है।
क्या है पूरा मामला?
साल 1993 में तरनतारन जिले में पुलिस ने 7 युवकों को घर से उठा लिया था। इन्हें बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में रखा गया, अमानवीय यातनाएं दी गईं और फिर दो अलग-अलग फर्जी एनकाउंटर दिखाकर मार डाला गया। झूठी FIR दर्ज कर पुलिस ने दावा किया कि मारे गए युवक आतंकी थे, जबकि हकीकत में इनमें से चार युवक पंजाब सरकार के स्पेशल पुलिस ऑफिसर (SPO) थे।
न शव दिए, न अस्थियां
पुलिस ने मृतकों के शव तक परिजनों को नहीं सौंपे और गुपचुप अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिजन न्याय के लिए सालों तक लड़ते रहे। अंतत: मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई को सौंपा गया। जांच में पुलिस की बनाई कहानियां फर्जी साबित हुईं।
CBI जांच में हुआ खुलासा
CBI की रिपोर्ट में सामने आया कि दोनों एनकाउंटर पूरी तरह फर्जी थे। पुलिस ने एक मामले में कहा था कि एक आरोपी मंगल सिंह को रिकवरी के लिए ले जाया जा रहा था, तभी उसके साथियों ने हमला कर दिया, जबकि दूसरे केस में नाके पर गोलीबारी का झूठा दावा किया गया था। जांच में ये दोनों घटनाएं मनगढ़ंत पाई गईं।
अब तक क्या हुआ?
सीबीआई ने इस मामले में कुल 10 पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इनमें से ट्रायल के दौरान 5 की मौत हो चुकी है, जबकि बाकी 5 को अब दोषी ठहराया गया है। सजा का ऐलान सोमवार को होगा।