नई दिल्ली | भारतीय रेलवे लगातार नई तकनीकों के साथ प्रयोग कर रहा है और इस बार उसने एक बेहद अनोखा कदम उठाया है। अब पटरियों के बीच में सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। यह पहल न केवल रेलवे के लिए बड़ी बचत का जरिया बनेगी, बल्कि इसे भविष्य का “गेम चेंजर” भी माना जा रहा है।
कहाँ हुई शुरुआत?
इस प्रयोग की शुरुआत बनारस रेल इंजन कारखाने से हुई है। यहाँ 70 मीटर लंबे ट्रैक के बीच 28 सोलर पैनल लगाए गए हैं। इनकी खासियत यह है कि ये हटाने योग्य हैं, यानी जरूरत पड़ने पर कुछ ही घंटों में इन्हें आसानी से हटाया और दोबारा लगाया जा सकता है।
कितना होगा फायदा?
रेलवे बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, इन पैनलों से करीब 15 किलोवाट बिजली पैदा होगी। इसका इस्तेमाल इंजन चलाने और अन्य कार्यों में किया जाएगा। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो रेलवे को बिजली की खरीद पर रोज़ाना होने वाले करोड़ों रुपये के खर्च से छुटकारा मिल सकता है।
आत्मनिर्भर और पर्यावरण अनुकूल
इन पैनलों का आकार 2278×1133×30 मिलीमीटर और वजन करीब 32 किलो है। रेलवे का मानना है कि इस कदम से न केवल आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल तकनीक को भी बढ़ावा मिलेगा। आने वाले समय में यह पहल रेलवे की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।