3 September, 2025
हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तनी एकादशी या जलझूलनी एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष यह पावन पर्व 03 सितंबर 2025, बुधवार को पड़ रहा है। व्रत का पारण 04 सितंबर 2025 को दोपहर 01:36 से 04:07 बजे के बीच करना शुभ रहेगा।
पूजा विधि
इस दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को पवित्र कर भगवान श्रीविष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद उन्हें शुद्ध जल, रोली, चंदन, धूप-दीप, पुष्प, नारियल, मिष्ठान्न, फल, पंचामृत और तुलसीदल अर्पित करें।
एकादशी व्रत कथा का पाठ करें और फिर तुलसी की माला से “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें। व्रत का पारण अगले दिन निर्धारित समय पर करें। पारण के बाद मंदिर में भगवान को भोग लगाकर दान-दक्षिणा अवश्य दें।
धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में करवट बदलते हैं। इसलिए इसे परिवर्तनी एकादशी कहते हैं। इसी दिन से देवउठनी एकादशी तक भगवान विष्णु शेषनाग की शैया पर पाताल में विश्राम करते हैं।कहा जाता है कि इस व्रत से जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।एक अन्य कथा के अनुसार, इसी दिन श्रीकृष्ण बाल रूप में माता यशोदा और नंद बाबा के साथ पहली बार ब्रज में भ्रमण के लिए निकले थे। इसलिए भक्त इस दिन भगवान को पालकी में बैठाकर नगर भ्रमण कराते हैं और झूला झुलाते हैं। यही कारण है कि इसे जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है।यह व्रत मोक्ष प्रदान करने वाला और शुभ फल देने वाला माना गया है। श्रद्धा और भक्ति के साथ इस व्रत का पालन करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है.