Kullu, Manminder
भारी बारिश और आपदाओं से जूझ रहे हिमाचल के कुल्लू ज़िले के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। मणिकर्ण घाटी का प्राचीन और ऐतिहासिक मलाणा गांव मानो पिछले एक साल से लगातार संकट के साए में है।
बीते साल 1 अगस्त को मलाणा डैम टूटने से गांव की सड़क और पुल बाढ़ में बह गए थे। ग्रामीणों ने मिलकर अस्थायी पुल बनाया, लेकिन इस साल की बाढ़ में वह भी बह गया। अब गांव तक पहुंचने का एकमात्र सहारा दुर्गम पगडंडियां हैं, जिन पर भी भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।
20 दिन से ना बिजली, ना पानी
गांव में पिछले 20 दिनों से न बिजली है और न ही पेयजल। हालात इतने खराब हैं कि लोग रोज़ाना 8 घंटे पैदल सफर तय कर जरी पहुंचते हैं और वहां से छोटे वाहनों के ज़रिये कुल्लू जाकर ज़रूरी सामान जुटाते हैं।
राशन और ईंधन की महंगाई ने ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। गांव में गैस सिलेंडर 3 से 4 हज़ार रुपये तक बिक रहा है। दुकानदारों ने राशन के दाम भी आसमान छूने लायक बढ़ा दिए हैं। आलम यह है कि गांव के 90% घरों का अनाज खत्म हो चुका है।
ग्रामीणों ने डीसी से लगाई गुहार
गांव के युवाओं का एक प्रतिनिधिमंडल आज कुल्लू पहुंचा और डीसी को अपनी समस्याओं से अवगत करवाया।
गांव के रूप सिंह ने बताया कि पिछले एक साल से न सड़क बनी है और न ही गांव में समय पर राशन पहुंच रहा है। अब हालात ऐसे हैं कि ज्यादातर घरों का राशन खत्म हो चुका है। सिलेंडर 3-4 हज़ार रुपये तक बिक रहा है। सरकार और प्रशासन से बार-बार गुहार लगाई, लेकिन समाधान अभी तक नहीं निकला।युवा भागचंद ने कहा, “गांव में कई लोग बीमार हैं। अस्पताल पहुंचना लगभग असंभव है। हमारी मांग है कि जब तक सड़क बहाल नहीं होती, तब तक गांव में ही स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्ति की जाए।”
वहीं कुल्लू के नीलेश गौतम ने कहा, “पिछले साल भी सरकार ने आश्वासन दिया था, लेकिन हालात जस के तस हैं। आज भी ग्रामीणों को 8 घंटे का पैदल सफर कर जरी पहुंचना पड़ता है। सरकार को अब तुरंत कदम उठाने होंगे।
चारों ओर से घिरा गांव
लगातार बारिश ने मलाणा को चारों ओर से घेर लिया है। न सड़क, न बिजली, न राशन और न ही इलाज की सुविधा—गांववाले कह रहे हैं कि अगर अब भी सरकार और प्रशासन ने ठोस पहल नहीं की तो हालात और भी भयावह हो जाएंगे।