हरियाणा | इस साल दशहरा के अवसर पर कई जिलों में हुई बारिश ने रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के दहन में बाधा डाली। प्रदेश के सात जिलों में पुतले भीग गए, जिसके कारण कई स्थानों पर उनका दहन नहीं हो सका, वहीं कुछ पुतले टूटने या गिरने से क्षतिग्रस्त हो गए। हालांकि, किसी बड़ी दुर्घटना की खबर नहीं आई। पुतलों को अंततः उसी स्थिति में जलाना पड़ा जिसमें वे पड़े थे।
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने 181 फीट ऊँचे रावण के दहन का प्रयास किया, लेकिन खराब रिमोट कंट्रोल के कारण यह संभव नहीं हो सका। अंततः पुतले बनाने वाले कारीगर ने ही उन्हें आग के हवाले किया।
पानीपत, सोनीपत, यमुनानगर और झज्जर में दोपहर बाद हुई बारिश ने समारोह में बाधा डाली। अंबाला कैंट के रामबाग ग्राउंड में रावण का पुतला आधा ही जल पाया और अंत में उसे गिराकर दहन करना पड़ा। इस दौरान आतिशबाजी के कारण चिंगारियां दर्शकों की तरफ उड़ गईं, जिससे कुछ समय के लिए अफरातफरी मची और सुरक्षा कारणों से रामलीला का मंचन रद्द करना पड़ा।
पानीपत में रावण का पुतला गिरकर टूट गया, वहीं सेक्टर-13-17 में कुंभकर्ण का पुतला क्षतिग्रस्त हुआ। करनाल में दशहरे से पहले ही बारिश में मेघनाद का पुतला गिर गया, जिसमें एक महिला घायल हो गई और उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। हादसे के बाद थोड़ी देर के लिए हड़कंप मचा, लेकिन बाकी कार्यक्रम सफलता पूर्वक संपन्न हुए।