कैथल | गांव जनेदपुर के 22 वर्षीय कर्मचंद पुत्र देशराज का विदेश जाने का सपना उसकी मौत के साथ समाप्त हो गया। जर्मनी जाने का झांसा देकर एजेंट ने उसे रूस भेजा, जहां उसे रूस-यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर भर्ती कर दिया गया। 6 सितंबर को बम विस्फोट में उसकी मौत हो गई। 17 अक्टूबर को उसका पार्थिव शरीर भारत लौटा और 18 अक्टूबर को गांव में अंतिम संस्कार किया गया।
कर्मचंद 7 जुलाई को एजेंट बिट्टू के माध्यम से विदेश गया था। परिवार के अनुसार, उसने 8 लाख रुपये देकर जर्मनी भेजने की ठानी थी, लेकिन धोखे से रूस भेज दिया गया। परिवार को उसकी मौत की जानकारी 19 सितंबर को मिली, जब रूस में सेवा कर रहे एक सैनिक ने टेलीग्राम के जरिए सूचना दी।
पुलिस ने एजेंट के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। परिजन सरकार से मांग कर रहे हैं कि कर्मचंद को युद्ध में शहीद का दर्जा दिया जाए, साथ ही आर्थिक मदद और उसकी बहन के लिए सरकारी नौकरी दी जाए। ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार के समय नम आंखों से विदाई दी और “कर्मचंद अमर रहे” के नारे लगाए।