Dharamshala, Rahul
:दीपावली के बाद धर्मशाला की हवा अब सांस लेने लायक नहीं रह गई है। शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) बढ़कर 120 तक पहुंच गया है, जबकि पिछले वर्ष दीपावली के बाद यह स्तर 109 था। प्रदेश के 12 शहरों में की गई मॉनिटरिंग में पांच शहर मॉडरेट रेंज (100–200) में आए हैं, जबकि गुड रेंज (0–50) में कोई भी शहर नहीं है।
बद्दी सबसे प्रदूषित, धर्मशाला चौथे स्थान पर
बद्दी प्रदेश का सबसे प्रदूषित शहर, जबकि धर्मशाला चौथे स्थान पर दर्ज हुआ है। अगस्त–सितंबर में यहां डस्ट स्तर 50 माइक्रोन के आसपास था, लेकिन दीपावली के बाद इसमें तेजी से इजाफा हुआ है।हिमाचल प्रदेश स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड धर्मशाला के प्रिंसिपल साइंटिफिक ऑफिसर संजीव शर्मा ने बताया कि दीपावली से पहले धर्मशाला का एक्यूआई लगभग 61 था, जो अब लगभग दोगुना होकर 120 तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि “दीपावली के दिन आतिशबाजी और पटाखों ने हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ा दिया है।”
ग्रीन पटाखे भी बढ़ा रहे हैं प्रदूषण
संजीव शर्मा के अनुसार, हालांकि सरकार ने ग्रीन पटाखों के उपयोग की अनुमति दी थी, लेकिन एक्यूआई में हुई वृद्धि से साफ है कि साधारण पटाखे भी चलाए गए। उन्होंने बताया कि जहां सामान्य पटाखे 100 लेवल तक प्रदूषण करते हैं, वहीं ग्रीन पटाखे भी 30–40 लेवल तक प्रदूषण बढ़ाते हैं।
डमटाल में मामूली अंतर
डमटाल में इस बार दीपावली के दौरान एक्यूआई 97 दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष 98 था। यह क्षेत्र औद्योगिक है, पर दीपावली पर उद्योग बंद रहते हैं। पठानकोट से आने वाली धूल इसका मुख्य कारण बताई गई है।
धूल से बढ़ रहा खतरा
संजीव शर्मा ने बताया कि हिमाचल में गैसीय प्रदूषण कम है — सल्फर डाइऑक्साइड व नाइट्रोजन ऑक्साइड दोनों ही सुरक्षित सीमा में हैं। लेकिन डस्ट (PM-10 और PM-2.5) की मात्रा अधिक है, जो सीधे फेफड़ों पर असर डालती है और बीमारियों का खतरा बढ़ाती है।
13 से 27 अक्टूबर तक मॉनिटरिंग जारी
कनिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी पूजा कौंडल ने बताया कि दीपावली अवधि में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा विशेष मॉनिटरिंग की जाती है। इस बार 13 अक्टूबर से 27 अक्टूबर तक अध्ययन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि इस बार धर्मशाला में PM-10 कम है, पर PM-2.5 अधिक, जिससे एक्यूआई दोगुना दर्ज किया गया।उन्होंने बताया कि पंजाब व दिल्ली की पराली और स्थानीय आतिशबाजी से हवा में धूल और धुआं बढ़ा है। ग्लोबल वार्मिंग और विकास कार्यों के चलते भी एक्यूआई में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।