Shimla, 19 November -:हिमाचल प्रदेश में होने वाले पंचायत और नगर निकाय चुनावों की तैयारियों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला उपायुक्तों के कामकाज पर कड़ी नाराज़गी जताई है। आयोग का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक निर्देश पहले ही जारी कर दिए गए थे, लेकिन अधिकांश उपायुक्तों ने इन निर्देशों का पालन नहीं किया। इसी लापरवाही को देखते हुए आयोग ने सभी उपायुक्तों से जवाब तलब किया है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार उपायुक्तों को समय पर आरक्षण रोस्टर घोषित करने के लिए कहा गया था, लेकिन अब तक किसी भी जिले से रोस्टर जारी नहीं किया गया है। यही नहीं, चुनाव सामग्री उठाने की प्रक्रिया में भी जिला प्रशासन गंभीरता नहीं दिखा रहा। वोटर लिस्टों का निर्धारित समय में प्रकाशन न होना नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना गया है। आयोग ने चेतावनी दी है कि ऐसे मामलों को अब राज्यपाल के समक्ष भी प्रस्तुत किया जा सकता है, क्योंकि वे प्रदेश के संवैधानिक प्रमुख हैं और चुनावी तैयारियों की जानकारी उन्हें देना आवश्यक है।
आयोग ने कहा कि प्रदेश में पंचायतों के पुनर्सीमांकन का काम पूरा हो चुका है, और यदि इस प्रक्रिया को दोबारा शुरू किया गया तो पूरी चुनावी तैयारियों पर असर पड़ेगा। शहरी निकायों का कार्यकाल जनवरी के मध्य तक और पंचायतों का कार्यकाल जनवरी के अंत तक समाप्त हो रहा है, इसलिए समय पर चुनाव करवाना अत्यंत आवश्यक है।
राज्य चुनाव आयुक्त अनिल कुमार खाची ने स्पष्ट किया कि उपायुक्तों की ओर से दिखाई जा रही उदासीनता चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार तय समय पर मतदाता सूची जारी करना अनिवार्य है, और ऐसा न करने पर स्पष्टीकरण लिया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि आयोग अपनी संपूर्ण तैयारी की रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपेगा, क्योंकि सरकार और आयोग के बीच बेहतर तालमेल से ही चुनाव सुचारू रूप से संभव होंगे।इस बीच आयोग ने यह भी बताया कि चुनावों के लिए करीब 3 करोड़ मतपत्रों की छपाई पूरी कर ली गई है। मतदान प्रक्रिया से जुड़े सभी महत्वपूर्ण फॉर्म भी मुद्रित कर दिए गए हैं। आयोग का कहना है कि चुनावी तैयारी पूरी है, बस जिलों से अपेक्षित सहयोग की आवश्यकता है ताकि पूरी प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।