Mandi, Dharamveer-:जल शक्ति विभाग में कार्यरत एमटीएस और पैरा वर्कर आगामी 28 नवंबर को धर्मशाला के तपोवन में शीतकालीन सत्र के दौरान बड़ा शक्ति प्रदर्शन करने जा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि बीते तीन वर्षों से वे स्थायी नीति बनाने और न्यूनतम वेतन लागू करने की मांग लगातार उठा रहे हैं, लेकिन सरकार अभी तक उनकी समस्याओं पर सकारात्मक निर्णय नहीं ले रही। मंडी में आयोजित बैठक के बाद कर्मचारी संघर्ष मोर्चा ने स्पष्ट कर दिया कि यदि इस बार भी सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो अगला कदम शिमला में सीधा घेराव होगा।
बैठक में कर्मचारी संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष विवेक कुमार ने कहा कि वे अब तक सुक्खू सरकार को 68 बार मांग पत्र सौंप चुके हैं, मगर हर बार उनकी मांगों को नज़रअंदाज़ किया गया। उन्होंने बताया कि खुद उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कैबिनेट में उनका मुद्दा रखने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस नीति नहीं बन पाई। विवेक कुमार ने कहा कि लगातार हो रही अनदेखी से कर्मचारी अब आर-पार की लड़ाई लड़ने को मजबूर हैं। धर्मशाला में प्रदर्शन के दौरान सरकार को मांग पत्र सौंपा जाएगा और इसके बाद भी समाधान न मिलने पर शिमला में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
पैरा वर्कर यूनियन के जिला अध्यक्ष नरेंद्र कुमार ने भी आरोप लगाया कि सत्ता में आने से पहले कांग्रेस सरकार ने युवाओं को 58 वर्ष तक स्थायी नौकरी देने का वादा किया था, परंतु सरकार अब अपने वादों से पीछे हट रही है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल से लेकर आपदा के समय तक कर्मचारियों ने बिना रुके सेवाएं दीं, लेकिन उनके हक की अनदेखी लगातार जारी है। ऐसे में आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।कर्मचारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज़ उठा रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि सरकार उनकी वर्षों पुरानी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी। मगर यदि 28 नवंबर को तपोवन में होने वाला शक्ति प्रदर्शन भी सरकार को जगाने में नाकाम रहता है, तो प्रदेश की राजधानी शिमला में बड़ा घेराव होगा, जिसके लिए तैयारियाँ शुरू कर दी जाएंगी।