Shimla, 16 June –आगामी सेब सीजन को लेकर शिमला के उपायुक्त अनुपम कश्यप ने आज विभिन्न विभागों के अधिकारियों और बागवानों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस दौरान सेब तुड़ान और ढुलाई से संबंधित व्यवस्थाओं—जैसे सड़कें, यातायात, बिजली, पानी और कंट्रोल रूम संचालन—की विस्तार से समीक्षा की गई और जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए गए।
सड़क मरम्मत और कंट्रोल रूम की व्यवस्था पर ज़ोर
बैठक के दौरान बागवानों ने विशेष रूप से जर्जर सड़कों और यातायात प्रबंधन को लेकर चिंता जताई, ताकि फसल समय पर और सुरक्षित रूप से मंडियों तक पहुँच सके। उपायुक्त ने आश्वासन दिया कि सेब जिला शिमला की आर्थिकी का मुख्य आधार है और बागवानों की समस्याओं का समाधान सर्वोच्च प्राथमिकता पर किया जाएगा।
उन्होंने जानकारी दी कि जिले में चार कंट्रोल रूम 15 जुलाई से सक्रिय होंगे, जो पूरे सीजन के दौरान सेब तुड़ान और ढुलाई की निगरानी करेंगे। साथ ही सभी एसडीएम को निर्देश दिए गए हैं कि वे एक सप्ताह के भीतर खस्ताहाल सड़कों की पहचान कर उनकी मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजें।
संयुक्त किसान मंच की मांगें और सोशल मीडिया विवाद
बैठक में संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने भाग लेते हुए कहा कि सेब सीजन के दौरान फर्जी व्यापारियों और धोखाधड़ी की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि हिमफैड और एपीएमसी के कलेक्शन सेंटर 15 जुलाई से पहले खोले जाएं, ताकि बागवानों को समय पर फसल बेचने में सुविधा मिल सके।
हरीश चौहान ने सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित आदेश को लेकर भी सवाल उठाए, जिसमें बागवानों को खेत से सीधे फसल न भेजने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कोई आदेश है तो यह बागवानों के अधिकारों का उल्लंघन है। बागवान अपनी फसल खेत से बेचें या मंडी में, यह उनका अधिकार और निर्णय होना चाहिए।
डीसी ने दिया भरोसा
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने भरोसा दिलाया कि प्रशासन सेब सीजन के सुचारू संचालन के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहा है और बागवानों के हितों की रक्षा प्राथमिकता रहेगी।