Shimla, 27 November-:हिमाचल प्रदेश इस वर्ष पर्यावरणीय चुनौती का सामना कर रहा है। लगातार दूसरे साल नवंबर लगभग सूखा बीत रहा है, जिससे राज्य के प्राकृतिक जल स्रोतों और आम जनजीवन पर संकट गहराता जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, इस माह प्रदेश में सामान्य से लगभग 90 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। बीते वर्ष नवंबर में 99 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई थी, जबकि 2021 में भी यह कमी 95 प्रतिशत तक रही थी। तीन वर्षों की यह लगातार कमी चिंताजनक है और निकट भविष्य में प्रदेश के जल भंडारों के सूखने की आशंका बढ़ा रही है।
सूखे की यह स्थिति कृषि, बागवानी और पेयजल आपूर्ति पर सीधा प्रभाव डाल सकती है। राज्य के सभी जिलों में वर्षा सामान्य से काफी कम रही है, और मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 25 नवंबर तक बारिश की कोई संभावना नहीं है, जिससे तत्काल राहत की उम्मीद क्षीण है।वर्षा की कमी के साथ ही शुष्क ठंड ने भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। ऊंचे क्षेत्रों में तापमान तेजी से गिर रहा है और पश्चिमी विक्षोभों की अनुपस्थिति के कारण ठंडी, शुष्क हवाएँ प्रदेश में ठिठुरन बढ़ा रही हैं। मंगलवार रात से बुधवार सुबह तक प्रदेश के 24 स्थानों पर पारा सामान्य से काफी नीचे रिकॉर्ड किया गया। लाहौल-स्पीति के कुकुमसेरी और ताबो में तापमान शून्य से नीचे पहुंच गया है, जबकि केलांग भी लगभग शून्य के आसपास है। निचले क्षेत्रों—सुंदरनगर, बिलासपुर और आसपास के इलाकों—में सुबह के समय हल्का कोहरा बढ़ती सर्दी का संकेत दे रहा है।सूखे और कड़ाके की ठंड की दोहरी मार ने किसानों, बागवानों और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द मौसम में बदलाव नहीं आया, तो आने वाले समय में जल संकट और बढ़ सकता है।