मुंबई | अहमदाबाद विमान हादसे ने न सिर्फ देश को झकझोर दिया, बल्कि मुंबई के पवई में एक बुजुर्ग पिता से उनका इकलौता सहारा भी छीन लिया। एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के क्रैश में जान गंवाने वाले अनुभवी पायलट कैप्टन सुमित सभरवाल का पार्थिव शरीर जब पांच दिन बाद उनके घर पहुंचा, तो मातम की चुप्पी हर दीवार से टकरा रही थी।
82 वर्षीय पिता ने बेटे को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। कुछ साल पहले पत्नी को खो चुके इस पिता के लिए सुमित ही पूरा परिवार थे। हादसे से पहले तक सुमित जब भी मुंबई आते, हर शाम पिता के साथ वॉक पर निकलते। दुर्घटना से ठीक दो दिन पहले भी दोनों ने यही रूटीन निभाया था।
हादसे में सिर्फ एक व्यक्ति बचा, बाकी 241 की मौत
12 जून को अहमदाबाद से लंदन रवाना हुई एयर इंडिया की फ्लाइट टेक-ऑफ के कुछ ही मिनट बाद रिहायशी इलाके में क्रैश हो गई। हादसे में केवल एक व्यक्ति जीवित बचा, जबकि कैप्टन सुमित, को-पायलट क्लाइव कुंदर और 10 क्रू मेंबर समेत 241 लोगों की मौत हो गई।
8200 घंटे की उड़ान, फिर भी ज़मीन से जुड़े रहे सुमित
कैप्टन सुमित 2012 से ड्रीमलाइनर उड़ा रहे थे और 8200 से अधिक फ्लाइंग आवर्स का अनुभव रखते थे। वे नए पायलटों को प्रशिक्षण देने में भी आगे रहते थे। उनके सहयोगियों और पड़ोसियों के अनुसार, सुमित बेहद विनम्र और ज़िम्मेदार पायलट थे। हाल ही में उन्होंने नौकरी छोड़कर पिता की देखभाल करने का विचार भी जताया था।
अब केवल यादें और मिसालें रह गईं
पवई स्थित उनके घर में अब केवल सुमित की बहन (जो दिल्ली में रहती हैं) के occasional दौरे और पिता की खामोशी रह गई है। सुमित का जाना न केवल एक पिता की व्यक्तिगत क्षति है, बल्कि भारतीय एविएशन सेक्टर के लिए भी एक बड़ी क्षति है।