Shimla, Sanju-:संजौली स्थित विवादित मस्जिद मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा दिए गए हालिया आदेश के बाद क्षेत्र में एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। वक्फ बोर्ड की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने मस्जिद की निचली दो मंजिलों—ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर—पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश जारी किए हैं। इस निर्णय के तहत फिलहाल इन दोनों मंजिलों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, जबकि ऊपरी तीन मंजिलों को हटाने संबंधी निचली अदालतों के आदेश बरकरार रखे गए हैं। यदि वक्फ बोर्ड स्वयं इन मंजिलों को नहीं हटाता है, तो नगर निगम को इन्हें गिराने की स्वतंत्रता होगी। मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।
वक्फ बोर्ड द्वारा निगम कमिश्नर और जिला अदालत के फैसलों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसी बीच, संजौली क्षेत्र में हिंदू संघर्ष समिति पिछले दिनों मस्जिद के बाहर धरने पर बैठी थी। शुक्रवार की जुम्मे की नमाज के दौरान यहां विवाद भी सामने आया था, जिसके चलते प्रशासन ने स्थिति पर करीबी नजर रखी।
हाईकोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए हिंदू संघर्ष समिति के अधिवक्ता जगतपाल ने कहा कि यह मामला वर्ष 2010 में कमिश्नर न्यायालय में शुरू हुआ था। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद 5 अक्टूबर 2024 को पहली बार ऊपर की तीन मंजिलों को हटाने का आदेश आया। इसके बाद 21 अक्टूबर 2024 को हाईकोर्ट ने मामले को समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने का निर्देश दिया। Jagatpal ने बताया कि कमिश्नर ने आदेश मानते हुए पूरी मस्जिद को अवैध घोषित किया, जिसे चुनौती देने पर 30 अक्टूबर 2025 को अदालत ने दोबारा मस्जिद को अवैध करार देते हुए दो महीने का समय दिया। अब हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि ऊपर की तीन मंजिलें हटाई जाएँगी और नीचे की दो मंजिलों पर स्थिति जस की तस रहेगी।
वहीं देवभूमि संघर्ष समिति के प्रांत सचिव विजेंद्र पाल सिंह ने कहा कि संजौली में हुआ आंदोलन कोई योजनाबद्ध राजनीतिक गतिविधि नहीं था, बल्कि स्थानीय हिंदू समाज की स्वतःस्फूर्त एकजुटता थी। उन्होंने कहा कि समिति इस मुद्दे को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने देगी और न्यायालय के आदेशों का पूर्ण पालन करेगी। उनका कहना है कि वर्तमान में समिति कोई आंदोलन नहीं कर रही है और अदालत के निर्देशों के अनुरूप ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।