Mandi, Dharamveer-किसानों को अब फसलों के साथ उगने वाले खरपतवारों और खेतों में नमी की कमी को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। जाइका परियोजना (जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी) के तहत किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसमें 50 प्रतिशत उपदान पर मल्चिंग शीट उपलब्ध करवाई जा रही है। यह शीट खेतों की ऊपरी सतह पर बिछाई जाती है, जिससे मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है और खरपतवारों का उगना लगभग समाप्त हो जाता है।
मल्चिंग शीट पॉलीथीन से बनी एक मजबूत परत होती है, जिसे खेतों पर बिछाने के बाद किसान फसल को सुरक्षित और बेहतर तरीके से विकसित कर सकते हैं। सामान्य परिस्थितियों में खेतों में फसलों के साथ कई तरह के खरपतवार उग आते हैं, जिनकी सफाई में किसानों का काफी समय और धन खर्च होता है। लेकिन मल्चिंग शीट इस अतिरिक्त मेहनत को कम कर देती है, जिससे किसान अधिक ध्यान फसल उत्पादन और गुणवत्ता पर दे सकते हैं।जाइका परियोजना के अधिकारी स्वयं गांवों और खेतों में जाकर किसानों को इसके लाभ समझा रहे हैं और उन्हें शीट लगाने में हर तरह का सहयोग भी प्रदान कर रहे हैं। जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. हेमराज वर्मा ने बताया कि मंडी जिले में अभी तीन फसलों—स्ट्रॉबेरी, मटर और लहसुन—पर मल्चिंग शीट बिछाई जा रही है। इसके लिए कुल 63 हजार स्क्वायर मीटर क्षेत्र को कवर करना लक्ष्य है, जिसमें से 10 हजार स्क्वायर मीटर क्षेत्र पर शीट बिछाई जा चुकी है, जबकि 30 हजार स्क्वायर मीटर का कार्य तेजी से प्रगति पर है।
डॉ. वर्मा के अनुसार, यह प्रयास किसानों की मेहनत को कम करने, उत्पादन बढ़ाने और फसलों में गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने अधिक से अधिक किसानों से इस तकनीक को अपनाने की अपील की है ताकि वे खेती को आधुनिकता के साथ लाभकारी बना सकें।
बल्ह उपमंडल के कसारला गांव के किसान रूप सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा जानकारी देने के बाद उन्होंने अपनी दो बीघा भूमि पर स्ट्रॉबेरी के दस हजार पौधे लगाए हैं और मल्चिंग शीट का उपयोग शुरू किया है। उनके अनुसार, अब न तो खरपतवार उग रही है और न ही नमी की चिंता है। विभागीय अधिकारियों का पूरा सहयोग उन्हें समय-समय पर मिलता रहा है, जिससे वे इस आधुनिक तकनीक का अधिकतम लाभ उठा पा रहे हैं।