Sirmour, Satish Sharma-:हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के सीमावर्ती पश्मी गांव के लिए आज का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब छत्रधारी चालदा महासू महाराज ब्रह्म मुहूर्त में विधि-विधान के साथ नए महासू मंदिर में विराजमान हुए। सुबह करीब 4 बजे हुए इस पावन अनुष्ठान के साक्षी बनने के लिए हजारों श्रद्धालु गांव में एकत्रित हुए। पूरे क्षेत्र में आस्था, भक्ति और उत्सव का वातावरण देखने को मिला।
बताया जा रहा है कि छत्रधारी चालदा महासू महाराज अब आगामी एक वर्ष तक पश्मी गांव में विराजमान रहेंगे। ग्रामीणों के अनुसार पिछले 5 से 6 वर्षों से महाराज के आगमन की प्रतीक्षा की जा रही थी, जो आज पूर्ण हुई। जैसे ही महाराज मंदिर में विराजमान हुए, श्रद्धालुओं ने जयकारों और पारंपरिक देव वाद्य यंत्रों के साथ इस क्षण को अविस्मरणीय बना दिया।
महासू मंदिर के भंडारी रणवीर चौहान ने बताया कि लगभग पांच वर्ष पूर्व देवचिन्ह के रूप में एक घांड्डा (बकरा) पश्मी गांव पहुंचा था, जिससे यह संकेत मिला कि महाराज यहां विराजमान होना चाहते हैं। इसके बाद गांववासियों ने महासू महाराज से अपनी भावना साझा की। भंडारी ने बताया कि प्रारंभ में गांव में पर्याप्त स्थान न होने के कारण आयोजन को लेकर संशय था, लेकिन महाराज की कृपा से परिस्थितियां स्वतः अनुकूल होती चली गईं। महाराज की प्रेरणा से ग्रामीणों ने पहल की और मात्र एक वर्ष के भीतर भव्य मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण हो गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि महाराज की कृपा से यह छोटा सा गांव आज पूरे क्षेत्र के लिए आस्था का केंद्र बन गया है। जिस मंदिर का निर्माण वर्षों से संभव नहीं हो पा रहा था, वह महासू महाराज की कृपा से रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ। श्रद्धालुओं ने इसे देव कृपा का प्रत्यक्ष प्रमाण बताया।पश्मी गांव पहुंचने से पूर्व छत्रधारी चालदा महासू महाराज का शिलाई मुख्य बाजार में भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर उद्योग मंत्री एवं स्थानीय विधायक हर्षवर्धन चौहान सहित हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे। पारंपरिक रीति-रिवाजों, देव नृत्य और जयकारों के बीच महाराज का स्वागत किया गया, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।श्रद्धालुओं का विश्वास है कि महासू महाराज के पश्मी गांव में विराजमान होने से क्षेत्र में सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली आएगी। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता और जनसहयोग का भी अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है।