Shimla, 16 December-:हिमाचल प्रदेश राजकीय अध्यापक संघ के राज्य प्रधान वीरेंद्र सिंह चौहान ने प्रदेश के विद्यालयों को CBSE बोर्ड से जोड़ने के सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक दूरदर्शी कदम बताया है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के अनुरूप बेहतर शैक्षणिक अवसर प्राप्त होंगे।
वर्तमान शिक्षकों को ही CBSE स्कूलों में मौका देने की मांग
हालांकि, CBSE से संबद्ध होने वाले विद्यालयों में शिक्षकों के लिए प्रस्तावित चयन परीक्षा को लेकर उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की है। चौहान ने स्पष्ट कहा कि वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों को ही उन्हीं विद्यालयों में पढ़ाने का अवसर दिया जाना चाहिए और किसी भी प्रकार की पुनः चयन परीक्षा आयोजित करना अनुचित है। ऐसा करने से यह गलत संदेश जाएगा कि वर्तमान शिक्षक अयोग्य हैं, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है।उन्होंने कहा कि राज्य बोर्ड और CBSE—दोनों में NCERT का समान पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है और नई शिक्षा नीति के तहत परीक्षाएं भी ‘कॉम्पिटेंसी बेस्ड’ ढांचे पर आधारित हैं। राज्य के शिक्षक पहले ही सरकारी नियमों के अनुसार चयनित हैं। उन्होंने स्नातक या स्नातकोत्तर शिक्षा, बी.एड., टीईटी और चयन आयोग की कठिन परीक्षाएं उत्तीर्ण की हैं। वर्षों के अनुभव के बाद दोबारा परीक्षा लेना शिक्षकों के मनोबल को तोड़ने वाला कदम होगा।
चौहान ने यह भी कहा कि जिन स्कूलों को CBSE में बदला जा रहा है, वहां आज अच्छी छात्र संख्या और उत्कृष्ट परिणाम वर्तमान शिक्षकों की मेहनत का ही परिणाम हैं। अतिरिक्त कक्षाएं लेना, कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देना और निरंतर मार्गदर्शन देना—यह सब शिक्षकों की निष्ठा को दर्शाता है।उन्होंने सवाल उठाया कि यदि दक्षता की जांच आवश्यक है, तो परीक्षा केवल शिक्षकों के लिए ही क्यों? CBSE स्कूलों में क्लर्क, लैब सहायक और अन्य कर्मचारी भी कार्यरत होंगे। केवल शिक्षकों को ही परीक्षा के दायरे में लाना भेदभावपूर्ण है।
शिक्षकों के लिए प्रस्तावित परीक्षा वापस लेने की मांग
राज्य अध्यापक संघ ने सुझाव दिया कि यदि किसी प्रकार का मूल्यांकन आवश्यक है तो पिछले 10–15 वर्षों के शैक्षणिक परिणामों को आधार बनाया जाए, क्योंकि विद्यार्थियों का प्रदर्शन ही शिक्षक की वास्तविक योग्यता का प्रमाण होता है। चौहान ने निजी CBSE स्कूलों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां शिक्षकों की क्षमता पर भरोसा किया जाता है और किसी प्रकार की चयन परीक्षा नहीं होती, फिर भी परिणाम उत्कृष्ट रहते हैं। संघ ने सरकार से मांग की कि प्रस्तावित चयन परीक्षा को तुरंत वापस लिया जाए और वर्तमान अनुभवी शिक्षकों को उनके पदों पर बने रहने दिया जाए, ताकि स्कूलों में अव्यवस्था न फैले, शिक्षकों में असंतोष न बढ़े और विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो।