Dharamshala, Rahul-:हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति में सरकार की कथित उदासीनता को लेकर भारी रोष देखने को मिल रहा है। विधानसभा के शीत सत्र के दौरान किए गए वायदे के बावजूद पेंशनर्स संग वार्ता न बुलाने पर समिति ने आंदोलन को तेज करने की चेतावनी दी है। पेंशनर्स दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालय धर्मशाला में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पेंशनर्स ने लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ खुलकर नाराजगी जाहिर की।
समिति के पदाधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सरकार ने समय रहते पेंशनर्स की जायज मांगों को पूरा नहीं किया तो बजट सत्र के दौरान शिमला में सचिवालय का घेराव किया जाएगा। इसके बाद भी यदि कोई समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा।संयुक्त संघर्ष समिति एवं राज्य पेंशनर्स संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 28 नवंबर को विधानसभा तपोवन धर्मशाला में पेंशनर्स के साथ वार्ता का जो आश्वासन दिया था, उससे सरकार पीछे हटती नजर आ रही है। पेंशनर्स दिवस से पहले वार्ता न बुलाना सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है।उन्होंने कहा कि एक जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 तक सेवानिवृत्त हुए पेंशनर्स को अभी तक संशोधित ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन और लीव इनकैशमेंट का लाभ नहीं मिला है। इसके अलावा छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत केवल 50 हजार रुपये की एक किश्त ही दी गई है, जबकि शेष चार से पांच लाख रुपये से अधिक की राशि अब भी लंबित है। हिमाचल पथ परिवहन निगम के पेंशनर्स को तो यह किश्त भी नहीं मिली है।
सुरेश ठाकुर ने बताया कि महंगाई राहत भत्ते की 142 माह की बकाया राशि और 13 प्रतिशत डीआर अब तक जारी नहीं किया गया है। जुलाई 2023 से केंद्र की तर्ज पर 4 प्रतिशत डीआर देय था, लेकिन राज्य सरकार ने इसे घटाकर 3 प्रतिशत कर दिया, जिससे पेंशनर्स में गहरा आक्रोश है। इसके साथ ही पिछले पांच वर्षों से चिकित्सा भत्ता बिल लंबित है, जिससे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कई पेंशनर्स को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।उन्होंने अर्बन लोकल बॉडी के पेंशनर्स को भी अन्य विभागों की तरह 1 जनवरी 2016 के वेतनमान के अनुसार पेंशन देने की मांग उठाई। अंत में पेंशनर्स ने सरकार को चेतावनी दी कि मांगें जल्द पूरी न होने पर संघर्ष को और तेज किया जाएगा।