नई दिल्ली | दुनिया में चल रहे युद्धों का असर अब केवल ज़मीन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसमान भी इसकी गवाही दे रहा है। रूस-यूक्रेन और ईरान-इजरायल के बीच जारी तनाव ने वैश्विक हवाई यातायात पर गंभीर असर डाला है। Flightradar24 द्वारा साझा की गई ताज़ा रिपोर्ट में सामने आया है कि ईरान, यूक्रेन और तिब्बत के ऊपर के आसमान पूरी तरह सुनसान हो चुके हैं — इन क्षेत्रों में नागरिक विमानों की आवाजाही लगभग रुक गई है।
युद्ध के डर से खाली हुए हवाई रास्ते
13 जून को इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए एयरस्ट्राइक के बाद, ईरानी हवाई क्षेत्र से वाणिज्यिक विमानों ने आपातकालीन रूप से रास्ता बदल लिया। रिपोर्ट में बताया गया कि इस हमले में ईरान की मिसाइल प्रणाली, सैन्य कमांड केंद्र और संभावित परमाणु ठिकाने निशाना बने। इसके जवाब में ईरान ने भी सतर्कता बढ़ा दी, जिससे नागरिक उड़ानों को वहां से गुजरना असंभव हो गया।
Flightradar24 के टाइम-लैप्स वीडियो में दिखा कि जैसे ही हमला हुआ, वैसे ही आसमान में मौजूद सभी वाणिज्यिक विमान इजरायली मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचने के लिए ईरानी क्षेत्र से दूर हटते नज़र आए। इसी तरह, यूक्रेन में जारी युद्ध के चलते वहाँ का एयरस्पेस पहले ही बंद किया जा चुका है। तिब्बत के ऊपर भी चीन की सैन्य गतिविधियों और सीमित एयर ट्रैफिक की वजह से यह क्षेत्र खाली देखा गया।
तकनीक और हथियारों ने बढ़ाई वैश्विक चिंता
दुनिया अब आधुनिक ड्रोन, मिसाइलों और स्मार्ट हथियारों के युद्ध की चपेट में है। इन हाईटेक युद्ध उपकरणों के कारण हवाई क्षेत्र असुरक्षित हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है, तो वैश्विक उड़ानों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा।
भू-राजनीतिक तनाव से जुड़ी वैश्विक हवाई बाधाएं
इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कैसे भू-राजनीतिक संघर्ष केवल सीमित क्षेत्रों तक नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की कनेक्टिविटी को भी प्रभावित करता है। हवाई रास्तों का बंद होना ना केवल यात्रियों की असुविधा का कारण बन रहा है, बल्कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था और लॉजिस्टिक्स चैन पर भी दबाव डाल रहा है।