Shimla, Sanju-:शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में मरीज से कथित मारपीट का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। एक ओर जहां पीड़ित मरीज के परिजन आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर सरकार और स्वास्थ्य मंत्री से मिल चुके हैं, वहीं दूसरी ओर रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन (आरडीए) खुलकर डॉक्टर के समर्थन में सामने आ गई है। दोनों पक्षों के अलग–अलग दावों के चलते मामला अब संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
गलती मानने को नहीं तैयार, उल्टा मरीज पर लगाए बदतमीजी के आरोप
मरीज के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टर ने उनके बेटे के साथ अमानवीय व्यवहार किया और उसके साथ मारपीट की। परिजनों का कहना है कि अस्पताल जैसे स्थान पर, जहां मरीज और उनके परिवार पहले से ही मानसिक तनाव में रहते हैं, वहां इस तरह की घटना बेहद निंदनीय है। इसी को लेकर पीड़ित परिवार ने स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल से मुलाकात की और दोषी डॉक्टर के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।
पीड़ित मरीज के पिता ने भावुक होते हुए ये कहा
पीड़ित मरीज के पिता भावुक नजर आए और उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को समाज में भगवान का दर्जा दिया जाता है, क्योंकि लोग अपनी जान और अपनों की जिंदगी उन्हें सौंपते हैं। लेकिन आईजीएमसी में उनके बेटे के साथ जो व्यवहार हुआ, उसने इस विश्वास को गहरा आघात पहुंचाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह से उनके बेटे के साथ कथित रूप से मारपीट की गई, उससे साफ जाहिर होता है कि आरोपी डॉक्टर अपने पेशे की गरिमा के अनुरूप आचरण करने में असफल रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे डॉक्टर को न केवल सख्त सजा दी जाए, बल्कि भविष्य में किसी और मरीज के साथ ऐसी घटना न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
डॉक्टर के समर्थन में उतरी रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन
वहीं दूसरी तरफ आईजीएमसी की रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन डॉक्टर के बचाव में उतर आई है। आरडीए के अध्यक्ष सोहेल शर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आरोपी डॉक्टर पर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं। उनका दावा है कि घटना के बाद से डॉक्टर मानसिक तनाव में है और मामले को एकतरफा तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। सोहेल शर्मा के अनुसार, डॉक्टर ने किसी भी तरह की बदसलूकी या मारपीट नहीं की, बल्कि मरीज ही डॉक्टर से दुर्व्यवहार कर रहा था और स्थिति को बिगाड़ने की कोशिश की गई।रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन का कहना है कि अस्पताल में डॉक्टरों को अक्सर तनावपूर्ण हालात में काम करना पड़ता है और कई बार मरीज या उनके परिजन आक्रोश में आकर चिकित्सकों के साथ बदतमीजी करते हैं। आरडीए ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि सच्चाई सामने आनी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष को बदनाम न किया जाए।
जांच पूरी निष्पक्षता के साथ की जाएगी-स्वास्थ्य मंत्री
मामले के बढ़ते दबाव को देखते हुए राज्य सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी डॉक्टर को निलंबित कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर का मरीज के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल मामले की जांच जारी है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कड़ी कार्रवाई की जाएगी।स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि अस्पतालों में मरीजों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिले। साथ ही डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा और गरिमा भी उतनी ही जरूरी है। इसलिए जांच पूरी निष्पक्षता के साथ की जाएगी, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषी चाहे जो भी हो, उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकें।
आईजीएमसी का यह मामला अब केवल एक व्यक्ति या संस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह डॉक्टर–मरीज संबंधों, अस्पतालों में व्यवहार और व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। एक ओर मरीज और उनके परिजन न्याय की गुहार लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर डॉक्टर संगठन अपने साथी के सम्मान और सुरक्षा की बात कर रहे हैं। ऐसे में सबकी निगाहें अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि इस विवाद की असल सच्चाई क्या है और आगे क्या कार्रवाई होती है।