गोहाना। गोहाना क्षेत्र में तुड़ा व्यापारी के कथित अपहरण से जुड़े मामले का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। शुरुआती तौर पर जिसने पुलिस प्रशासन को हिला दिया था, वह मामला अब एक सुनियोजित साजिश के रूप में सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि गांव खंदराई निवासी तुड़ा व्यापारी अशोक ने पुलिस से बचने के लिए खुद के अपहरण की झूठी कहानी रची थी।
डीसीपी गोहाना भारती डबास ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि 23 दिसंबर को पुलिस को सूचना मिली थी कि अशोक का चार-पांच लोगों ने पीछा किया, जिसके बाद वह लापता हो गया। उसकी आखिरी लोकेशन नूरनखेड़ा गांव के पास एक पुलिया के समीप मिली, जहां से उसकी बाइक और कोट बरामद हुए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत डॉग स्क्वायड और कई टीमों को सर्च ऑपरेशन में लगाया।
लगातार तलाशी के बाद पुलिस ने अशोक को हरियाणा रोडवेज की बस से पानीपत से गोहाना आते समय बरामद कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि यह पूरा मामला एक पूर्व नियोजित योजना का हिस्सा था।
तुड़ी जलाने के मामले में आरोपी, गिरफ्तारी से बचने की साजिश
डीसीपी ने बताया कि 16 दिसंबर को तुड़ी से भरी एक ट्रॉली में आग लगाने की घटना हुई थी, जिसमें करीब नौ लाख रुपये का नुकसान हुआ था। इस मामले में अशोक मुख्य आरोपी था और पुलिस के पास इससे जुड़े सीसीटीवी फुटेज भी मौजूद थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अपने अपहरण की झूठी कहानी गढ़ी।
जांच में यह भी सामने आया कि अशोक ने अपने साथी अक्षय के साथ मिलकर पेट्रोल पंप से पेट्रोल लिया और बड़ौता निवासी व्यक्ति की तुड़ी से भरी ट्रॉली को आग के हवाले कर दिया। इसके बाद उसने अपहरण का नाटक रचते हुए नूरनखेड़ा के पास अपनी बाइक खड़ी की, कोट को जानबूझकर फाड़ा ताकि संघर्ष का भ्रम पैदा हो, और फिर बस के जरिए पहले पानीपत तथा बाद में पंजाब के लुधियाना चला गया।
आपसी कहासुनी बनी वारदात की वजह
पुलिस जांच में सामने आया कि तुड़ी जलाने की यह घटना आपसी कहासुनी के कारण की गई थी। अशोक की इस साजिश में उसका एक साथी भी शामिल था, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। डीसीपी भारती डबास ने कहा कि तकनीकी साक्ष्यों और सतर्क जांच के आधार पर पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून से बचने के लिए रची गई कोई भी साजिश अधिक समय तक नहीं टिकती और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।