करनाल। हरियाणा की जेलों में अब गैंगस्टर कल्चर का पूरी तरह खात्मा कर अपराध की जगह सुधार, अनुशासन और कौशल विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। यह दावा हरियाणा जेल महानिदेशक आलोक राय ने करनाल जिला जेल के निरीक्षण के दौरान मीडिया से बातचीत में किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब जेलों से न फिरौती की कॉल होती है, न धमकी और न ही मोबाइल के जरिए किसी तरह की आपराधिक गतिविधि संचालित हो रही है।
जेल महानिदेशक आलोक राय ने निरीक्षण के दौरान कैदियों के रहन-सहन, स्वच्छता, सुरक्षा व्यवस्था और उनके लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का जायजा लिया। साथ ही जेल में संचालित वोकेशनल ट्रेनिंग, आईटीआई कोर्स और कौशल विकास कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी भी ली।
गैंगस्टर कल्चर पर सख्ती
मीडिया से बातचीत में आलोक राय ने बताया कि कार्यभार संभालते ही जेलों में सक्रिय गैंगस्टरों और कुख्यात अपराधियों की पहचान कर उन्हें अलग-अलग जेलों में शिफ्ट किया गया। इसका सकारात्मक परिणाम सामने आया और जेल से किसी भी तरह की फिरौती, धमकी या मोबाइल आधारित अपराध की कोई घटना दर्ज नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि बीते चार महीनों से सोशल मीडिया पर भी किसी गैंगस्टर की सक्रियता नजर नहीं आई है।
युवाओं को अपराध से दूर रखने की पहल
जेल महानिदेशक ने कहा कि गैंगस्टर कल्चर को खत्म करना इसलिए जरूरी था ताकि युवा पीढ़ी अपराध की ओर आकर्षित न हो। पहली बार गैंगस्टरों को भी साफ-सफाई और अन्य सुधारात्मक कार्यों से जोड़ा गया, जिससे उनमें बदलाव देखने को मिला।
मानसिक स्वास्थ्य पर फोकस
आलोक राय ने बताया कि जेलों में बंद लगभग 60 प्रतिशत कैदी मानसिक तनाव और अवसाद से जूझते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए हर जेल में काउंसलर नियुक्त किए गए हैं, ताकि कैदियों को मानसिक संबल मिल सके और आत्मघाती घटनाओं को रोका जा सके।
सजा के साथ सुधार का मॉडल
उन्होंने कहा कि जेल विभाग का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि कैदियों को सुधार कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके लिए हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) के साथ समझौता किया गया है। जेलों में ट्रेनिंग लेने वाले कैदियों को HKRN पोर्टल पर रजिस्टर किया जाएगा, जिससे रिहाई के बाद उन्हें रोजगार के अवसर मिल सकें। गुरुग्राम, अंबाला, करनाल, पानीपत और फरीदाबाद की जेलों में वोकेशनल ट्रेनिंग और आईटीआई कोर्स शुरू किए जा रहे हैं।
नई जेलें, आधुनिक सुविधाएं
आलोक राय ने बताया कि प्रदेश की जेलों की क्षमता 23 हजार कैदियों की है, जबकि वर्तमान में करीब 27 हजार कैदी बंद हैं। रेवाड़ी में नई जेल बनकर तैयार हो चुकी है। रोहतक में अत्याधुनिक हाई सिक्योरिटी जेल का निर्माण तेजी से चल रहा है, जो अगले चार महीनों में पूरा हो जाएगा। इसके अलावा फतेहाबाद और पलवल में नई जेलें निर्माणाधीन हैं, जबकि अंबाला और पंचकूला में भी नई जेलों के निर्माण का प्रस्ताव है।
उन्होंने कहा कि विभाग का स्पष्ट लक्ष्य है कि जेल में आने वाला हर कैदी किसी न किसी कौशल से लैस होकर बाहर निकले, ताकि वह आत्मनिर्भर बन सके और समाज में सम्मानजनक जीवन जी सके।