Hamirpur, Arvind-:हमीरपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार की जीरामजी योजना ग्रामीण भारत को सशक्त बनाकर विकसित भारत के सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि इस योजना से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज की अवधारणा को साकार करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने जीरामजी योजना को नए सिरे से प्रभावी ढंग से लागू करना शुरू किया है। इस योजना के तहत गांवों में विकास कार्यों को गति मिलेगी और पंचायतों को अधिक अधिकार देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।उन्होंने बताया कि मनरेगा के अंतर्गत भ्रष्टाचार पर लगाम लगाते हुए केंद्र सरकार ने एक ही वर्ष में एक लाख ग्यारह हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं। जीरामजी योजना के माध्यम से जल संरक्षण, आजीविका मिशन और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बेहतर और टिकाऊ कार्य किए जाएंगे। इस दौरान विधायक इंद्रदत्त लखनपाल, आशीष शर्मा और पूर्व विधायक राजेंद्र राणा भी उपस्थित रहे।
सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ही केंद्र सरकार ने जीरामजी के माध्यम से गांवों के विकास को प्राथमिकता दी है। उन्होंने बताया कि हाल ही में संसद सत्र में विकसित भारत जीरामजी विधेयक प्रस्तुत किया गया है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और आने वाले समय में देश की आर्थिक वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष बिना वजह जीरामजी योजना को लेकर बयानबाजी कर रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि इस योजना में पंचायतों को पूरे अधिकार दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जीरामजी योजना में 90 प्रतिशत फंड केंद्र सरकार द्वारा दिया जाएगा और केवल 10 प्रतिशत खर्च राज्य सरकारों को वहन करना होगा।उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में मनरेगा पर अधिकतम 33 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि मोदी सरकार में एक साल में ही एक लाख ग्यारह हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यूपीए सरकार के दस वर्षों में कुल 2 लाख 13 हजार 220 करोड़ रुपये, जबकि एनडीए सरकार ने 8 लाख 53 हजार 810 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
सांसद ने कहा कि जीरामजी योजना के तहत मजदूरों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। यदि पंचायत स्तर पर काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो बेरोजगारी भत्ता भी दिया जाएगा। मजदूरों की उपस्थिति के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम और कार्यों की निगरानी के लिए जियो टैगिंग की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि इस योजना से ग्रामीण आधारभूत ढांचे को मजबूत किया जाएगा और गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़ेंगे।