Mandi, Dharamveer-:चिट्टे जैसे घातक नशे को छोड़ने के बाद भी कई युवा दोबारा इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं। मंडी जिले के रघुनाथ का पधर में स्थित प्रदेश के पहले और एकमात्र सरकारी आदर्श नशा निवारण एवं पुनर्वास केंद्र के आंकड़े इस ओर इशारा कर रहे हैं कि नशे से मुक्ति की राह आसान नहीं है। केंद्र में हर वर्ष करीब 5 से 6 प्रतिशत युवा दोबारा उपचार के लिए लौट रहे हैं, जिनमें अधिकतर चिट्टे के आदी रहे हैं।
03 सितंबर 2021 से अब तक इस केंद्र से 311 लोग नशे को अलविदा कहकर सामान्य जीवन की ओर लौट चुके हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार कुछ युवा इलाज के बाद फिर उसी माहौल में चले जाते हैं, जहां नशे की शुरुआत हुई थी। यही कारण उनके दोबारा फिसलने की सबसे बड़ी वजह बन रहा है।आदर्श नशा निवारण एवं पुनर्वास केंद्र में तैनात डॉ. दुष्यंत ठाकुर का कहना है कि चिट्टा आज के समय में सबसे खतरनाक नशों में से एक बन चुका है। इससे पीड़ित युवाओं को पूरी तरह बाहर निकालना चिकित्सकों के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने बताया कि कई मामलों में अभिभावक इलाज के बीच में ही बच्चों को घर ले जाते हैं, या फिर उपचार के बाद उनकी गतिविधियों पर नजर नहीं रखते, जिससे वे पुराने संगत और माहौल में लौट जाते हैं।डॉ. दुष्यंत के अनुसार, नशे से पूरी तरह उबरने के लिए परिवार की भूमिका बेहद अहम है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों के साथ समय बिताएं, उन्हें सकारात्मक गतिविधियों में व्यस्त रखें और उनके व्यवहार पर सतत निगरानी रखें।
वहीं, जोनल अस्पताल मंडी के एमएस डॉ. दिनेश ठाकुर ने बताया कि यह केंद्र पूरी तरह सरकारी है और यहां नशे के आदी लोगों का इलाज पूर्णतः निशुल्क किया जाता है। रहने, खाने और दवाइयों सहित सभी सुविधाएं सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे बिना झिझक उपचार के लिए आगे आएं।गौरतलब है कि प्रदेश में चिट्टे के बढ़ते खतरे को देखते हुए इन दिनों प्रदेशव्यापी अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें सत्ता और विपक्ष दोनों मिलकर इस सामाजिक बुराई के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि सामूहिक प्रयासों से प्रदेश को इस जानलेवा नशे से जल्द मुक्ति मिलेगी।