चंडीगढ़। सोने और चांदी की रिकॉर्ड तोड़ कीमतों ने सर्राफा बाजार की चमक को फीका कर दिया है। शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन के बावजूद आभूषणों की मांग में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। इसका सबसे गहरा असर उन कारीगरों पर पड़ा है, जिनकी आजीविका पूरी तरह गहनों के निर्माण पर निर्भर है। हालात ऐसे बन गए हैं कि हजारों कारीगरों के हाथों से काम छिन गया है और उनके सामने रोज़मर्रा के खर्च चलाने का संकट खड़ा हो गया है।
जो कारीगर कभी दिन-रात सोने-चांदी को आकार देने में जुटे रहते थे, वे आज काम की आस में बैठे हैं। कानपुर, दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद और गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों में कारीगरों को या तो काम से हटा दिया गया है या बेहद सीमित ठेके पर रखा जा रहा है। कई इलाकों में 60 से 70 प्रतिशत तक कारीगर बेरोजगार हो चुके हैं।
कानपुर के चौक इलाके में जेवर तराशने वाले 52 वर्षीय शंकर महल पिछले कई दिनों से दुकान के बाहर अपने औजारों को निहारते हुए बैठे रहते हैं। उनके पास न तो सोना है, न चांदी और न ही कोई नया ऑर्डर। उनकी आंखों में सिर्फ एक ही सवाल तैर रहा है—अब घर का चूल्हा कैसे जलेगा?
महंगाई ने बदली ग्राहकों की पसंद
सोने-चांदी के दाम आसमान छूने से ग्राहकों का रुझान भारी और पारंपरिक गहनों से हट गया है। अब लोग कम वजन और हल्के डिजाइन की ज्वैलरी को तरजीह दे रहे हैं। इससे न सिर्फ कारीगरों को मिलने वाला काम घटा है, बल्कि उनकी मेहनताना भी काफी कम हो गया है।
दिल्ली में आभूषणों की बिक्री 60 से 70 प्रतिशत तक गिर चुकी है। लाजपत नगर, करोल बाग, चांदनी चौक, रोहिणी और सुभाष नगर जैसे बाजारों में इसका सबसे ज्यादा असर दिख रहा है। ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वैलरी ट्रेड फेडरेशन के अनुसार, कीमतों में तेज उछाल के कारण फिजिकल ज्वैलरी की खरीदारी में भारी गिरावट आई है।
छोटे कारोबारी भी संकट में
इस मंदी की मार सिर्फ कारीगरों तक सीमित नहीं है। सर्राफा कारोबार से जुड़े छोटे और मध्यम व्यापारी भी गहरे संकट से जूझ रहे हैं। कई ज्वैलरी दुकानों में ऑर्डर लगभग बंद हो गए हैं, जिससे उत्पादन ठप पड़ता जा रहा है। गाजियाबाद सर्राफ एसोसिएशन के संरक्षक राजकुमार गुप्ता का कहना है कि अब मांग के बराबर ही काम बचा है।
नोएडा में करीब 65 प्रतिशत कारीगर बेरोजगार हो चुके हैं। नोएडा ज्वैलर्स एसोसिएशन के महासचिव के मुताबिक, पहले ऑर्डर मिलने के बाद तैयार माल बिकता था, लेकिन अब 1000 से अधिक दुकानों में से कई में काम पूरी तरह बंद हो गया है।
पेशा बदलने को मजबूर कारीगर
लगातार काम न मिलने से कारीगरों के लिए परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। कई युवा कारीगर अब पारंपरिक पेशा छोड़कर दूसरे रोजगार की तलाश में जुट गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही हालात रहे, तो सदियों पुरानी आभूषण निर्माण की यह कला खत्म होने के कगार पर पहुंच सकती है।
सरकार से राहत की मांग
कारीगर संगठनों ने सरकार से आर्थिक सहायता, सामाजिक सुरक्षा और विशेष राहत पैकेज की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते मदद नहीं मिली, तो सर्राफा उद्योग की रीढ़ माने जाने वाले कारीगर पूरी तरह टूट जाएंगे।