कैथल। हरियाणा के कैथल जिले से भ्रष्टाचार को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। अदालत ने रिश्वत लेने के मामले में जिला परिषद सदस्य विक्रमजीत सिंह और पार्षद प्रतिनिधि भारत हरसौला को दोषी करार देते हुए दोनों को सात-सात साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट के इस फैसले के बाद जिले की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।
जानकारी के अनुसार, विक्रमजीत सिंह 2022 में हुए चुनाव में जिला परिषद सदस्य चुना गया था। चुनाव जीतने के बाद उस पर विकास कार्यों के बिल पास कराने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप लगा। इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने विक्रमजीत के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर के बाद उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।
10 प्रतिशत कमीशन की मांग का आरोप
मामले में सामने आया कि जींद निवासी ठेकेदार विजेंद्र से विकास कार्यों के बिल पास कराने की एवज में दोनों आरोपी लगातार 10 प्रतिशत कमीशन की मांग कर रहे थे। ठेकेदार के अनुसार, दोनों पार्षदों के वार्डों में वाटर कूलर और वाटर टैंक लगाने का कार्य चल रहा था, जिसकी कुल लागत करीब 30 लाख रुपये थी। इसी काम के भुगतान को मंजूरी देने के बदले रिश्वत की डिमांड की जा रही थी।
एक लाख रुपये लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टीम ने योजना बनाकर कार्रवाई की। बताया गया कि करनाल रोड पर शुगर मिल से कुछ दूरी पर कार में दोनों आरोपियों को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया था।
इसके बाद केस अदालत में चला और सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने दोनों को दोषी मानते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई।
यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश माना जा रहा है कि रिश्वतखोरी करने वालों को कानून किसी भी कीमत पर बख्शने वाला नहीं है।